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दानेदार नैनो NPK लॉन्च करेगा IFFCO, मात्र 5 किलो में करेगा 50 किलो बोरी जैसा काम

इफको ने वैश्विक स्तर पर भी अपने विस्तार को गति दी है। संस्था फिलहाल 25 से अधिक देशों को नैनो उर्वरक निर्यात कर रही है। आगामी चरण में इफको ब्राजील में अपना पहला विदेशी संयंत्र स्थापित कर रही है।

Published: 15:01pm, 11 Dec 2025

भारतीय किसान उर्वरकों के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार का एक नया अध्याय देखने वाले हैं। विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको (IFFCO) ने घोषणा की है कि वह 2027 की शुरुआत तक नैनो ग्रेन्युलर एनपीके (Nano Granular NPK) बाजार में उतारने जा रही है। यह उत्पाद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे तीन आवश्यक पोषक तत्वों का समावेश करेगा। इसकी विशेषता यह होगी कि यह तरल के बजाय दानेदार रूप (granular form) में होगा, जिससे पौधों की जड़ों को सीधे पोषण मिलेगा।

इफको के प्रबंध निदेशक के.जे. पटेल ने बताया कि यह नया नैनो एनपीके परंपरागत एनपीके की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावकारी साबित होगा। उनके अनुसार, जहां किसान वर्तमान में 50 किलो की एनपीके बोरी का उपयोग करते हैं, वही कार्य नैनो एनपीके की केवल 5 किलो से कम मात्रा से पूरा हो सकेगा। इस उन्नत उत्पाद के निर्माण हेतु गुजरात के कांडला स्थित संयंत्र में नई सुविधा विकसित की जा रही है तथा आवश्यक सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया जारी है।

हालांकि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के लॉन्च को चार वर्ष बीत चुके हैं, मगर इन उर्वरकों का उपयोग अभी निर्धारित लक्ष्यों से काफी कम है। इफको की मौजूदा वार्षिक निर्माण क्षमता 289.5 मिलियन बोतल (500 मिली) है, जबकि अप्रैल से नवंबर 2025-26 के दौरान केवल 18.77 मिलियन बोतलों की बिक्री हो सकी है। इसके बावजूद, संस्था ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 80 मिलियन बोतल नैनो यूरिया की बिक्री का लक्ष्य रखा है।

पटेल ने स्वीकार किया कि किसानों में नैनो उर्वरकों के उपयोग को लेकर अभी भी जागरूकता की कमी है। “हमारे आउटरीच और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है,” उन्होंने कहा। विशेषज्ञों का मानना है कि तरल नैनो यूरिया और डीएपी को बड़े पैमाने पर अपनाने में अभी तीन वर्ष और लग सकते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तरल नैनो यूरिया मिट्टी में डालने के लिए नहीं, बल्कि यह पत्तियों पर छिड़काव हेतु उपयुक्त है।

इफको ने वैश्विक स्तर पर भी अपने विस्तार को गति दी है। संस्था फिलहाल 25 से अधिक देशों को नैनो उर्वरक निर्यात कर रही है। आगामी चरण में इफको ब्राजील में अपना पहला विदेशी संयंत्र स्थापित कर रही है। यह संयंत्र ‘इफको नैनोवेंशन्स’ और ब्राजील की ‘नैनोफर्ट (NANOFERT)’ कंपनी के बीच 7:3 के अनुपात में संयुक्त उद्यम के रूप में बनाया जाएगा। यहां सालाना 4.5 मिलियन लीटर नैनो उर्वरक का उत्पादन किया जाएगा।

सरकार का ध्यान अब नैनो उर्वरकों को बढ़ावा देने पर है ताकि पारंपरिक उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सिडी का बोझ कम किया जा सके। वर्ष 2025-26 में उर्वरक सब्सिडी का अनुमान 1.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 1.91 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वर्तमान में यूरिया की लागत लगभग 2,650 रुपये प्रति बैग है, जबकि किसानों को यह सिर्फ 242 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है। अंतर की राशि सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करती है।

चुनौतियों के बावजूद, इफको ने वित्त वर्ष 2024-25 में 4.5% बिक्री वृद्धि दर्ज की है, जिससे इसका कुल कारोबार 41,244 करोड़ रुपये रहा। इसी अवधि में शुद्ध लाभ में 16% की वृद्धि हुई और यह 2,823 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकारी नीतियों के सहयोग और किसानों तक प्रभावी जागरूकता अभियानों के जरिये यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में नैनो उर्वरक भारतीय कृषि में क्रांति ला सकेंगे।

YuvaSahakar Desk

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