मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhvinder Singh Sukhu) की अध्यक्षता में आयोजित हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों (Farmers), पशुपालकों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। इन निर्णयों का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को सशक्त बनाना, आपदा प्रबंधन को मजबूती देना और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।
कैबिनेट ने दूध उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से 3 रुपये प्रति लीटर की अतिरिक्त सब्सिडी देने की घोषणा की है। यह सुविधा गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से दूध बेचने वाले पात्र किसानों को मिलेगी। इस निर्णय से पशुपालन को प्रोत्साहन मिलेगा और किसानों की आमदनी में इजाफा होगा।
पशु कल्याण के क्षेत्र में सुधार लाने हेतु 500 पशु मित्रों की भर्ती को भी मंजूरी दी गई है। ये पशु मित्र गांवों में पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल, प्राथमिक उपचार और पशु कल्याण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए, सरकार ने प्रदेश की 3645 पंचायतों में आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र (Emergency Response Centres) स्थापित करने का निर्णय लिया है। ये यूनिट्स ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल चेतावनी, बचाव और राहत कार्यों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
ग्रीन पंचायत योजना के तहत 100 ग्राम पंचायतों में 500 किलोवाट सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए हिम ऊर्जा (HIMURJA) और पंचायतों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित किए जाएंगे। इन संयंत्रों से उत्पन्न होने वाले राजस्व का 40% हिस्सा पंचायतों को, 30% हिम ऊर्जा को, 20% राज्य सरकार को और 10% हिस्सा विधवाओं व अनाथों के कल्याण के लिए दिया जाएगा।


