हरियाणा सरकार ने राज्य में मत्स्य उद्योग (Fisheries Sector) को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय और तकनीकी सहयोग की मांग की है। मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, राज्य सरकार मछली बीज (Fish Seed) उत्पादन, मार्केटिंग और प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण के लिए बड़ी योजनाओं को लागू करना चाहती है। इसके तहत सोनीपत और सिरसा में आधुनिक मछली बाजार और प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना के साथ-साथ पंचकूला में एक विश्व स्तरीय “एक्वेरियम हाउस” स्थापित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है।
राज्य के कृषि एवं मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने जानकारी दी कि इन सभी परियोजनाओं की अनुमानित लागत लगभग 1,300 करोड़ रुपये है। सिरसा में झींगा प्रसंस्करण संयंत्र के लिए अलग से 200 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। मंत्री ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य राज्य के मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना, किसानों को वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध कराना और उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
मंत्री राणा ने हाल ही में हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य पालन सम्मेलन में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने राज्य की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,
“हरियाणा देश के प्रमुख भूमि-आबद्ध (landlocked) मछली उत्पादक राज्यों में से एक बनकर उभरा है। राज्य ने 23,850 हेक्टेयर जल क्षेत्र से 2.04 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया है और 166 करोड़ मछली बीज तैयार किए हैं, जो मत्स्य पालन संरचना की मजबूती को दर्शाता है।”
उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब प्रथम स्थान पर है, जबकि हरियाणा दूसरे स्थान पर है।
राणा ने यह चिंता भी जताई कि तटीय राज्यों की तुलना में भूमि-आबद्ध राज्यों को कम वित्तीय सहायता मिलती है, जिसका सीधा प्रभाव मछली पालकों की आय और राज्य की जीडीपी पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में मत्स्य पालन को वैकल्पिक आजीविका के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य के कई किसान पारंपरिक फसली खेती से हटकर मछली पालन की ओर रुख कर रहे हैं। इससे किसानों की आय बढ़ रही है, साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन और पराली प्रदूषण की समस्या में भी कमी आई है। मत्स्य पालन ने किसानों के लिए आय का एक स्थायी और टिकाऊ स्रोत उपलब्ध कराया है।
राज्य में बीज गुणवत्ता सुधारने के लिए हरियाणा सरकार ने सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर मछली बीज बैंक (Fish Seed Banks) सुनिश्चित किए हैं। भुवनेश्वर स्थित CIFA (Central Institute of Freshwater Aquaculture) से आनुवंशिक रूप से सुधारित मछली प्रजातियां प्राप्त की गई हैं। मंत्री के अनुसार, इससे राज्य का ब्रुड स्टॉक (Brood Stock) मजबूत हुआ है और מछली उत्पादन की समग्र उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
मंत्री राणा ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि सभी राज्यों में मछली बीज प्रबंधन और वितरण को लेकर राष्ट्रीय दिशा-निर्देश (National Guidelines) जारी किए जाएं और भूमि-आबद्ध राज्यों को विशेष योजनाओं के माध्यम से मदद दी जाए।
संरचना विकास के मोर्चे पर, सरकार ने सोनीपत के गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टीकल्चर मार्केट में मछली व्यापार के लिए एक समर्पित स्थान तय किया है। वहीं, फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, यमुनानगर और पंचकूला में आधुनिक थोक मछली बाजारों की स्थापना के लिए 300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं।
इसके अतिरिक्त, करनाल में मछली प्रसंस्करण इकाई (Fish Processing Unit) और सिरसा में झींगा प्रसंस्करण संयंत्र (Shrimp Processing Plant) की स्थापना की दिशा में भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
मंत्री ने यह भी बताया कि गुरुग्राम के सुल्तानपुर गांव में 5 एकड़ भूमि राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए हस्तांतरित की गई है। उन्होंने केंद्रीय मत्स्य मंत्रालय से आग्रह किया कि 2026-27 वित्तीय वर्ष में भूमि-आबद्ध राज्यों को प्राथमिकता देते हुए उनके विशेष मुद्दों पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाए।
इन सभी पहलों का संयुक्त उद्देश्य हरियाणा को देश के मत्स्य उद्योग में अग्रणी बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नए रोजगार, पारदर्शिता और आय के अवसर प्रदान करना है।


