केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की नई सहकारिता नीति को धरातल पर उतारने की दिशा में हरियाणा सरकार ने ठोस और संरचित कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के संकल्प और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के “संग चलें, संग बढ़ें” के मूल मंत्र को आधार बनाते हुए प्रदेश की सहकारी संस्थाओं को अब अनाज भंडारण जैसे रणनीतिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने इस दिशा में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अनाज भंडारण की पहल की शुरुआत सीएम पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों) से की जाए और इच्छुक सहकारी समितियों की पहचान कर उन्हें इस क्षेत्र में व्यावहारिक अवसर प्रदान किए जाएं। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएं केवल ऋण वितरण तक सीमित न रहें, बल्कि उत्पादन, भंडारण और मूल्य श्रृंखला में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
हरियाणा सिविल सचिवालय स्थित कमेटी कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में सहकारिता मंत्री ने विभागीय कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। इस बैठक में सहकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेन्द्र कुमार सहित प्रदेश की सभी प्रमुख सहकारी संस्थाओं के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जानकारी दी गई कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश में अनाज भंडारण क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से हैफेड को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। हैफेड को 10 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता के गोदाम निर्माण के लिए अधिकृत किया गया है। अब तक 3.35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों के निर्माण को स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि 1.38 लाख मीट्रिक टन क्षमता के प्रस्ताव राज्य स्तरीय समिति को भेजे जा चुके हैं।
सहकारिता मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में पंजीकृत सभी सीएम पैक्सों को अनाज भंडारण क्षेत्र में संभावनाओं से अवगत कराया जाए और उन्हें आवश्यक तकनीकी, प्रशासनिक व वित्तीय सहयोग प्रदान किया जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर भारत–विकसित भारत के लक्ष्य में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
इसके साथ ही सहकारी चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर चर्चा की गई। मंत्री ने सहकारी चीनी मिल संघ को निर्देश दिए कि घाटे में चल रही चीनी मिलों के पुनरुद्धार के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके लिए शीघ्र ही एक समन्वय समिति गठित करने के निर्देश दिए गए, जो सभी सहकारी चीनी मिलों का निरीक्षण कर उनके वित्तीय, तकनीकी और प्रबंधन संबंधी सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
गन्ना उत्पादक किसानों को आ रही श्रमिक समस्या के समाधान पर भी विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने कृषि विभाग के साथ समन्वय कर हार्वेस्टिंग मशीनों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त पानीपत में 200 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट की स्थापना प्रक्रिया में तेजी लाने तथा अन्य सहकारी चीनी मिलों में भी एथेनॉल उत्पादन की संभावनाओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
बैठक के दौरान सहकारिता विभाग से जुड़ी मुख्यमंत्री घोषणाओं और बजट घोषणाओं की भी बिंदुवार समीक्षा की गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सहकारिता क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ही किसानों, ग्रामीण युवाओं और सहकारी संस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाया जा सकता है।
इस अवसर पर हैफेड के एमडी मुकुल कुमार, डेयरी फेडरेशन के एमडी रोहित यादव, हरको बैंक के एमडी डॉ. प्रफुल्ला रंजन, हरकोफेड के एमडी नरेश गोयल, लेबरफेड के एमडी वीरेंद्र दहिया और हाउसफेड के एमडी योगेश शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


