केंद्र सरकार ने खरीफ सत्र 2025-26 के लिए किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित ब्याज छूट योजना (एमआईएसएस) को जारी रखने और इसके लिए आवश्यक निधि व्यवस्था को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन फैसलों से किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।
सामान्य किस्म के धान का एमएसपी 69 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2,369 रुपये प्रति क्विंटल और ‘ए ग्रेड’ धान का एमएसपी 2,389 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। अन्य फसलों जैसे मूंग, उड़द, कपास, मूंगफली, सूरजमुखी, ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का, अरहर, सोयाबीन, तिल और रामतिल के एमएसपी में भी वृद्धि की गई है। सभी फसलों का एमएसपी उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक रखा गया है। पिछले वर्ष की तुलना में रामतिल का एमएसपी सबसे अधिक 820 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा है, इसके बाद रागी (596 रुपये), कपास (589 रुपये) और तिल (579 रुपये) का स्थान है।

कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों को राहत प्रदान करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर संशोधित ब्याज छूट योजना को 2025-26 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को 3 लाख रुपये तक के अल्पकालिक ऋण पर केवल 4% ब्याज देना होगा। सामान्य रूप से 7% ब्याज दर लागू होती है, लेकिन समय पर भुगतान करने पर 3% की छूट दी जाती है। पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए यह लाभ 2 लाख रुपये तक के ऋण पर लागू होगा।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ये निर्णय किसानों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने, ग्रामीण ऋण प्रणाली को सशक्त बनाने और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। एमएसपी में वृद्धि से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, जबकि सस्ते ऋण से खेती में निवेश बढ़ेगा। यह कदम भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को और अधिक समृद्ध बनाने का है।


