गोवा सरकार राज्य में सहकारी आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार कर रही है। राज्य सहकारी सप्ताह की शुरुआत 14 नवंबर से होने जा रही है। इसमें सहकारी शिक्षा के लिए डिप्लोमा कोर्स शुरू करना और सामुदायिक खेती से बेकार पड़ी जमीन को फिर से आबाद करना शामिल है।
सहकारिता मंत्री सुभाष शिरोडकर ने बताया कि गोवा जल्द ही गुजरात की त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी (TSU) का राज्य चैप्टर शुरू करेगा। यह देश की पहली राष्ट्रीय सहकारी यूनिवर्सिटी है और गोवा में इसका संचालन गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (GIPARD) के सहयोग से होगा। यूनिवर्सिटी के तहत छह महीने के सर्टिफिकेट कोर्स के अलावा डिप्लोमा और डिग्री कोर्स भी शुरू किए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य क्रेडिट और अन्य सहकारी समितियों के प्रबंधकों और सदस्यों को औपचारिक शिक्षा के माध्यम से प्रशिक्षित करना है। साथ ही 18 से 30 वर्ष के युवाओं के लिए सहकारी समितियों में रजिस्ट्रेशन फीस माफ करने की योजना भी बनाई जा रही है। ताकि युवा बड़ी संख्या में इस क्षेत्र से जुड़ सकें।
सरकार राज्य में सक्रिय और निष्क्रिय सहकारी समितियों की पहचान करने के साथ-साथ उन गांवों में नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियां खोलने की योजना बना रही है। जहां अभी कोई सहकारी संस्था मौजूद नहीं है।
मंत्री शिरोडकर ने बताया कि सामुदायिक खेती और किसान क्लबों के माध्यम से करीब 2,000 एकड़ परती जमीन को फिर से खेती योग्य बनाया जाएगा। इसके तहत आधुनिक कृषि और मछली पालन को सहकारी आंदोलन से जोड़ा जाएगा। योजना के तहत हर चार तालुका में कम से कम दो मीठे पानी की मछली फार्म स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा सरकार राज्य के तीन घाटे में चल रहे सहकारी बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा भी कर रही है, ताकि उन्हें फिर से लाभदायक बनाया जा सके।
राज्य सरकार 20 नवंबर को गोवा राज्य सहकारी पुरस्कार 2023-24 भी प्रदान करेगी। ये पुरस्कार उन समितियों को दिए जाएंगे जिन्होंने आय, सदस्यता और सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
यह सभी पहलें गोवा में सहकारी क्षेत्र को नई ऊर्जा देने और इसे ग्रामीण विकास, आधुनिक खेती और रोजगार सृजन से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही हैं।


