भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डेयरी फार्मों की स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना, पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित करना है। अगर फार्म संचालक इन निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
FSSAI द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, डेयरी फार्म की रोजाना साफ-सफाई आवश्यक है। इसके लिए हौज पाइप का प्रयोग कर गोबर और अन्य कचरे को पानी के साथ बहाकर हटाया जाए। ठोस अपशिष्ट को फावड़े से इकट्ठा कर ठेला गाड़ी या ट्रैक्टर ट्रॉली की सहायता से हटाया जाए।
नाली का निर्माण “यू” आकार में होना चाहिए, जिसकी गहराई 6-8 सेमी और चौड़ाई 30-40 सेमी निर्धारित की गई है। सभी नालियों में उपयुक्त ढलान होना चाहिए ताकि तरल अपशिष्ट बहकर एकत्र हो सके। नालियों को एक इंस्पेक्शन चेम्बर और सैटिंग टैंक से जोड़कर तरल खाद को संग्रहण टैंक तक ले जाया जाए।
फर्श की सफाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध हो तो प्रेशर वॉशिंग की व्यवस्था की जाए। मिश्रित धोवन जल को चारा खेतों में उपयोग किया जा सकता है अथवा बायोगैस संयंत्रों में स्लरी के रूप में प्रयोग किया जाए।
ठोस खाद को एकत्र कर खाद के गड्ढे में वैज्ञानिक विधि से संग्रहित करना चाहिए, जिससे यह सही ढंग से डीकंपोज हो सके और कीट-मक्खियों से बचाव हो।
इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता और पशुधन स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देना है।


