सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि हालिया जीएसटी युक्तिकरण से देशभर के सहकारी संस्थानों विशेषकर डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, कृषि क्षेत्र और ग्रामीण उद्यमों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलने वाला है। इन लाभों का असर मध्य प्रदेश, कर्नाटक, दक्खन कन्नड़, छत्तीसगढ़, बिहार समेत सभी राज्यों में महसूस होगा।
डेयरी सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन
शाह ने बताया कि दूध और पनीर पर जीएसटी शून्य (0%) कर दिया गया है। वहीं मक्खन, घी, चीज और मिल्क कैन पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इन संशोधित दरों से दूध उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, मांग बढ़ेगी और डेयरी सहकारी समितियों की आय में सुधार होगा।
किसानों को उपभोक्ता मूल्य का हिस्सा, जो अभी लगभग 80% है, बढ़कर 85% तक पहुँचने की उम्मीद है।
फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में 5% जीएसटी से बढ़ेगी मांग
जैम, जेली, फ्रूट पल्प, जूस आधारित पेय, चॉकलेट, कॉर्नफ्लेक्स, आइसक्रीम, केक, पेस्ट्री और बिस्कुट जैसे प्रमुख उत्पादों पर जीएसटी को 12–18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। शाह ने कहा कि इससे सहकारी फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की बिक्री और राजस्व में तेजी आएगी।
कृषि एवं ग्रामीण उद्यमों को सीधे लाभ
मुख्य उर्वरक इनपुट जैसे अमोनिया, सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% किया गया है।
बायो-पेस्टीसाइड और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी अब 5% जीएसटी के दायरे में आ गए हैं। 1800 सीसी से कम क्षमता वाले ट्रैक्टर और उनके पुर्जों पर भी जीएसटी को 5% कर दिया गया है।
इन बदलावों से किसानों के इनपुट लागत कम होंगे, उर्वरकों की समय पर उपलब्धता बढ़ेगी और ग्रामीण उद्यमों व FPOs को सीधा फायदा मिलेगा।
अनौपचारिक उत्पादकों और महिला स्वयं-सहायता समूहों को प्रोत्साहन
शाह ने कहा कि बढ़ी प्रतिस्पर्धात्मकता से छोटे उत्पादक और महिला SHGs बड़े पैमाने पर सहकारी संस्थाओं से जुड़ेंगे, जिससे उन्हें बेहतर बाजार और अधिक आय मिलेगी।
सहकारिता क्षेत्र में डिजिटल गवर्नेंस की बड़ी प्रगति
मंत्री ने बताया कि सहकारिता मंत्रालय ने नेशनल कोऑपरेटिव डेटाबेस (NCD) के साथ रीयल-टाइम डेटा इंटीग्रेशन को मजबूत किया है।
- 27 मई 2025 को राज्यों के लिए स्टैंडर्ड API जारी की गई।
- 22 सितंबर 2025 को Push APIs और संबंधित SOPs साझा किए गए।
- 14 नवंबर 2025 को राज्यों को RCS कंप्यूटरीकरण के लिए एडवाइजरी जारी की गई।
- राजस्थान ने NCD पोर्टल से API इंटीग्रेशन पूरा भी कर लिया है।
उन्होंने बताया कि 8 मार्च 2024 को लॉन्च हुआ NCD अब 8.4 लाख से अधिक सहकारी समितियों और 32 करोड़ सदस्यों का एकल डेटा स्रोत बन चुका है।


