कर्नाटक सरकार ने राज्य के फिशरीज सेक्टर को संरचनात्मक रूप से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए एक मत्स्य पालन विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि तटीय समुदाय की जरूरतों को समझने और मत्स्य क्षेत्र को प्राथमिकता देने के लिए सरकार लगातार नई पहलें कर रही है।
इसके साथ ही मैकेनाइज्ड नावों के लिए सालाना डीजल लिमिट बढ़ाने, पारंपरिक नावों को सब्सिडी वाले औद्योगिक तेल उपलब्ध कराने और तटीय कर्नाटक के लिए अलग पर्यटन नीति लाने जैसी घोषणाएं भी की गईं। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि सरकार पहले ही 10,000 तालाब–झीलों को भरकर उनमें मत्स्य गतिविधियों की अनुमति दे चुकी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर बनेंगे।
इसी पृष्ठभूमि में बेंगलुरु में आयोजित तीन दिवसीय मत्स्य मेला (Fish Fair) रविवार को संपन्न हुआ। विश्व मत्स्य दिवस 2025 के उपलक्ष्य में आयोजित इस मेले में सरकारी एजेंसियों, प्राइवेट कंपनियों, एक्वाकल्चर सर्विस प्रोवाइडर्स और शोध संस्थानों ने हिस्सा लिया। कुल 52 स्टॉल्स में सजावटी मछलियों, चारे, मॉडर्न एक्वाकल्चर तकनीक और रिसर्च निष्कर्षों को प्रदर्शित किया गया।
एक लाख से ज्यादा लोगों की उपस्थिति, फूड स्टॉल्स में बढ़िया कारोबार
मत्स्य पालन विभाग के उप-निदेशक बाबिन बोपन्ना ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उम्मीद से कहीं अधिक लोग मेले में पहुंचे। उन्होंने कहा, “तीनों दिन लगभग एक लाख लोग आए। फूड स्टॉल्स और एक्वेरियम सेक्शन में सबसे ज्यादा भीड़ रही।”
कई फूड स्टॉल्स ने 50 से 70 हजार रुपये तक का कारोबार किया। बोपन्ना ने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को मत्स्य पालन को समझने, उससे जुड़ने और आधुनिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों का सम्मान
समापन समारोह में केलाडी शिवप्पा नायक कृषि और बागवानी विज्ञान विश्वविद्यालय (KSNUAHS) के पूर्व कुलपति वासुदेवप्पा सी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मत्स्य पालन विभाग के पूर्व निदेशक चंद्रशेखरिया एचएन, संयुक्त निदेशक शमा भट, रामकृष्ण एनआर और गणगधर मद्दिकेरे समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनकी सेवा के लिए सम्मानित किया गया।
सीएम का जोर – तटरेखा और जल संसाधन राज्य की ताकत
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि कर्नाटक के पास 320 किमी की तटरेखा और 5.5 लाख हेक्टेयर अंतर्देशीय जल संसाधन हैं। राज्य देश में मछली विशेषज्ञता में चौथे और कुल उत्पादन में तीसरे नंबर पर है। करीब 10 लाख लोगों की रोज़ी-रोटी इस सेक्टर पर निर्भर है।
डीके शिवकुमार की घोषणा – फिशिंग जाति पर नहीं, दिलचस्पी पर आधारित
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि तालाबों को कोऑपरेटिव सोसाइटी और नीलामी के माध्यम से सौंपने से गांवों में रोजगार और राज्य के लिए राजस्व दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा, “फिशिंग जाति पर आधारित नहीं है, यह दिलचस्पी, पक्के इरादे और आदर्शों पर आधारित है।”
इसके साथ ही उन्होंने तटीय कर्नाटक के लिए नई पर्यटन नीति की योजना का भी ऐलान किया, जिसमें फिशिंग-आधारित रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा।


