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Madhya Pradesh: किसानों को प्रति लीटर दूध पर मिलेगा 5 रुपए का बोनस, सहकारिता से दूध खरीदेगी सरकार

भविष्य में सरकार सहकारिता के जरिए दूध खरीदेगी, जिससे उत्पादकों की समस्याएँ कम होंगी और उनकी आय बढ़ेगी।

मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए हर ब्लॉक में ‘वृंदावन गांव’ भी स्थापित किया जा रहा है


Published: 15:46pm, 06 Mar 2025

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की है। जनजातीय लोकोत्सव के अवसर पर उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अब दूध उत्पादकों को 5 रुपए प्रति लीटर बोनस देगी। उन्होंने कहा कि दूध हर किसान के घर में होना चाहिए, क्योंकि यह पोषण का मुख्य स्रोत है।

सीएम ने गौपालन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत की पहचान दूध और दही से होती रही है। आज कुपोषण एक बड़ी समस्या बन चुका है, लेकिन यदि हर घर में गाय होगी और दूध उपलब्ध रहेगा, तो माताएं एवं बच्चे स्वस्थ रहेंगे।

सहकारिता और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सहकारिता को बढ़ावा देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार सहकारिता के माध्यम से दूध खरीदने का कार्य करेगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और दुग्ध उत्पादन में स्थिरता आएगी।

भारत में दुग्ध उत्पादन के मामले में मध्यप्रदेश तीसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश और दूसरे पर राजस्थान है। प्रदेश में प्रतिदिन 591 लाख किलोग्राम दूध का उत्पादन होता है। यहां प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 644 ग्राम प्रतिदिन है, जो कि राष्ट्रीय औसत 459 ग्राम से अधिक है। प्रदेश में 7.5 प्रतिशत गौवंश और भैंसों की संख्या है, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.05 प्रतिशत है। 2019 की पशु संगणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 187.50 लाख गौवंश और 103.5 लाख भैंसें पाई गई हैं।

गौवंश संरक्षण के लिए किए विशेष उपाय

मध्यप्रदेश सरकार ने गौवंश के आहार के लिए दी जाने वाली राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल गायों के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहन की व्यवस्था की गई है। ग्वालियर में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट लगाया गया है।

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए हर ब्लॉक में ‘वृंदावन गांव’ स्थापित किया जा रहा है। मई 2023 से शुरू की गई 406 चलित पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से अब तक 5.46 लाख से अधिक पशुओं को चिकित्सा सुविधा दी जा चुकी है।

YuvaSahakar Desk

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