भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2025 को लेकर जो ताजा रिपोर्ट जारी की है, वह देश के किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बेहद राहत भरी है। विभाग के अनुसार, इस बार मानसून 27 मई को केरल तट पर दस्तक देगा। यह पिछले 16 वर्षों में सबसे जल्दी मानसून की शुरुआत मानी जा रही है।
समय से मानसून के आने का सीधा फायदा खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ेगा। धान, मक्का, अरहर और सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई समय पर हो सकेगी, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर होगा। IMD ने यह भी बताया है कि इस साल जून से सितंबर के बीच सामान्य से 105% अधिक वर्षा होने की संभावना है। औसतन 87 सेंटीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 91 सेंटीमीटर तक पहुंच सकता है।
जलाशयों का जलस्तर बढ़ेगा, जिससे सिंचाई और पीने के पानी की स्थिति में भी सुधार आएगा। मानसून की प्रगति के अनुसार, जून के पहले सप्ताह में यह दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत तक पहुंचेगा। इसके बाद जून के दूसरे व तीसरे सप्ताह में यह मध्य और उत्तर भारत में फैलेगा। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में मानसून 25 से 30 जून के बीच पहुंचेगा और जुलाई के पहले सप्ताह तक यह पूरे देश को कवर कर लेगा।
हालांकि, विभाग ने यह भी चेताया है कि बारिश समान रूप से नहीं होगी। लद्दाख, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से कम वर्षा की संभावना है, जबकि अन्य राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए अचानक भारी वर्षा और बाढ़ की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।
मई और जून में उत्तर-पश्चिम भारत, खासकर राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब में लू और अधिक तापमान की चेतावनी दी गई है। पूर्वी भारत में 14 मई तक ऊष्ण लहर की स्थिति बनी रह सकती है।


