अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अंतर्गत राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (MPCDF) के सहयोग से भोपाल में राज्य स्तरीय ‘सहकार से समृद्धि गोष्ठी’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मुख्य अतिथि के रूप में तथा पशुपालन एवं डेयरी मंत्री लखन पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं मनोज पुष्प, पशुपालन एवं डेयरी संचालनालय के संचालक डॉ. पी. एस. पटेल तथा MPCDF के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवाणी भी मौजूद रहे।
अपने संबोधन में विश्वास सारंग ने कहा कि समाज को सुव्यवस्थित और सुगठित बनाने में सहकारिता की अहम भूमिका है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय ने इस क्षेत्र को नई गति प्रदान की है। उन्होंने “सहकार से समृद्धि” और “Cooperation within Cooperatives” की अवधारणा को भारत की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया।
मंत्री सारंग ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से देश की, विशेषकर ग्राम्य अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना आवश्यक है ताकि किसान स्वावलंबी बनें और देश की प्रगति में योगदान दें। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि NDDB और MPCDF मिलकर सांची ब्रांड को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। उन्होंने अमूल और बनास डेयरी को सफल सहकारी मॉडल के रूप में उदाहरण दिया और किसानों की भागीदारी को सांची की सफलता की रीढ़ बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश के प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS) अब न्यूनतम तीन विविध कार्य कर रही हैं, जो सहकारिता के विस्तार का प्रतीक है। मंत्री ने Cooperative Public Private Partnership (CPPP) अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे किसानों के उत्पादन के साथ-साथ कृषि अपशिष्ट का भी उपयोग सुनिश्चित होगा। उन्होंने “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूत सहकारिता तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी मंत्री लखन पटेल ने कहा कि राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों को साइलेंज (Silage) का उपयोग अपनाना चाहिए। इससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। उन्होंने सांची डेयरी के उन्नयन में एनडीडीबी की भूमिका की सराहना की।
MPCDF के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवाणी ने बताया कि NDDB के सहयोग से ईआरपी प्रणाली लागू की गई है, जिससे दूध उत्पादकों को समय पर उचित मूल्य मिल रहा है। उन्होंने बताया कि 26,000 गांवों में सहकारी डेयरियों की स्थापना की जाएगी, जिससे आगामी वर्षों में 52 लाख लीटर दूध का संकलन और 35 लाख लीटर दूध का विक्रय प्रतिदिन संभव होगा।
NDDB के महाप्रबंधक (सहकारिता सेवाएँ) राजेश गुप्ता ने कहा कि ‘सहकार से समृद्धि’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्य प्रदेश के निर्माण का संकल्प है।
कार्यक्रम में NDDB और MPCDF ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया।


