राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चंद्रपुरम पोन्नुसामी (सीपी) राधाकृष्णन को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। उनका कार्यकाल 11 सितंबर 2030 तक रहेगा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कई मुख्यमंत्री और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी व वेंकैया नायडू उपस्थित रहे। 53 दिन बाद पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए।
एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन ने 9 सितंबर को विपक्षी प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराया। 781 में से 767 सांसदों ने वोट डाले, जिनमें 752 वैध थे। उन्हें एनडीए के साथ YSRCP का समर्थन मिला और उम्मीद से 14 वोट अधिक मिले, जिससे क्रॉस-वोटिंग की अटकलें बढ़ीं। मतदान में बीजेडी, बीआरएस, अकाली दल और एक निर्दलीय सांसद समेत 13 सांसदों ने हिस्सा नहीं लिया।
शपथ से पहले राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा।
राधाकृष्णन 16 साल की उम्र से आरएसएस से जुड़े हैं। वे दो बार कोयम्बटूर से भाजपा सांसद चुने गए, तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष रहे और 19,000 किमी लंबी रथयात्रा निकाली। 2020–22 में भाजपा के केरल प्रभारी रहे। उन्होंने 2004 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया और ताइवान गए पहले संसदीय दल का हिस्सा बने। 2016 में उन्हें कॉयर बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया, जहां उनके कार्यकाल में कॉयर निर्यात 2,500 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचा।
शपथ के बाद उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन राज्यसभा नेताओं के साथ दोपहर 12:30 बजे बैठक करेंगे।


