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कपास क्रांति मिशन से बदलेगी सफेद सोना उगाने वाले किसानों की किस्मत

इस मिशन का लक्ष्य लंबे रेशे वाली कपास की खेती को आधुनिक तकनीक, विज्ञान और पारदर्शिता से सशक्त बनाना है। किसानों को अब “कपास किसान एप” से सीधे बाजार का लाभ मिलेगा, जबकि गुणवत्ता, मूल्य और भुगतान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी।

Published: 16:55pm, 12 Nov 2025

कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में भारत सरकार ने एक और बड़ी पहल की है। हैदराबाद में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने 600 करोड़ रुपये के ‘कपास क्रांति मिशन’ का शुभारंभ किया था। डिजिटल सशक्तिकरण के क्रम में ‘कपास किसान एप’ दीपावली के बाद लॉन्च किया गया था। इस मिशन का उद्देश्य लंबे रेशे वाली कपास की खेती को नई तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पारदर्शी व्यवस्था के साथ सशक्त बनाना है।

नई तकनीक से बदलेगा खेती का ढांचा

कपास क्रांति मिशन केवल एक कृषि योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का ब्लूप्रिंट है। इस योजना के तहत हाई डेंसिटी प्लांटेशन (HDP) तकनीक लागू की जाएगी, जिसमें पौधों को पास-पास लगाकर भूमि की उत्पादकता को दोगुना किया जा सकेगा।

स्मार्ट सिंचाई, कीट नियंत्रण और मिट्टी की वैज्ञानिक देखभाल से कपास की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। महाराष्ट्र के अकोला जिले में यह मॉडल पहले ही सफल साबित हुआ है और अब तेलंगाना के किसान वहां जाकर आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

“कपास किसान एप” से बाजार जेब में

‘कपास किसान एप’ किसानों के लिए डिजिटल क्रांति लेकर आया है। इस एप के माध्यम से किसान अपनी फसल की बिक्री का स्लॉट पहले से बुक कर सकते हैं। कीमत, गुणवत्ता और भुगतान की पूरी जानकारी एप पर ही उपलब्ध होगी। इससे न तो किसानों को मंडी में लाइन लगानी होगी और न भुगतान में देरी होगी। राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में स्थानांतरित होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी।

9 भाषाओं में जागरूकता और सख्त निगरानी

मिशन को गति देने के लिए 9 भाषाओं में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीण युवाओं की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान तेजी पकड़ रहा है। सरकार ने नकली बीज विक्रेताओं और बिचौलियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू की है। दोषियों के लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं और कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। किसानों को अब केवल प्रमाणित और उच्च उपज वाले बीज ही उपलब्ध कराए जाएंगे।

खरीद केंद्रों और जिनिंग यूनिट्स का विस्तार

दीवाली के बाद देशभर में 122 खरीद केंद्र और 345 जिनिंग यूनिट्स शुरू की गई हैं। हर केंद्र पर अफसर, पुलिस और किसान प्रतिनिधि की संयुक्त समिति निगरानी कर रही है ताकि किसी भी स्तर पर धांधली न हो सके।

कपास खरीद में बीते 10 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। वर्ष 2014 में जहां 173 लाख गांठ कपास खरीदी गई थी, वहीं 2024 में यह आंकड़ा 473 लाख गांठ तक पहुंच गया है। कारोबार का मूल्य भी 3.5 अरब डॉलर से बढ़कर 17 अरब डॉलर हो गया है।

किसानों की आय और रोजगार में वृद्धि

एमएसपी में बढ़ोतरी और संगठित खरीद प्रणाली से किसानों को अब उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल रहा है। केवल तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 65,000 करोड़ रुपये से अधिक की कपास खरीद की गई है।

यह मिशन आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है और इससे न केवल किसानों की आय दोगुनी होगी, बल्कि भारत का टेक्सटाइल उद्योग भी सशक्त बनेगा। बेहतर कपास उत्पादन से निर्यात बढ़ेगा और लाखों नए रोजगार सृजित होंगे।

जी. किशन रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना के खेतों से लेकर महाराष्ट्र के बाजारों तक बदलाव के बीज बो दिए गए हैं। अब बारी है समृद्धि, आत्मनिर्भरता और गर्व की नई फसल काटने की। कपास क्रांति मिशन भारत की कृषि व्यवस्था को आधुनिकता, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प है।

YuvaSahakar Desk

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