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दोहा में सहकारिता नेताओं ने पेश किया “इनक्लूसिव ग्लोबल इकॉनमी” का घोषणापत्र

दुनिया भर के सहकारी नेताओं ने सामाजिक और आर्थिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए “इनक्लूसिव ग्लोबल इकॉनमी” का संकल्प लिया

Published: 10:55am, 10 Nov 2025

दोहा में विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया भर के सहकारी और म्यूचुअल क्षेत्र के शीर्ष नेताओं ने “नई वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनुबंध” (Contract for a New Global Economy) लॉन्च किया। यह पहल अंतरराष्ट्रीय सहकारी संगठन (ICA) द्वारा गठित Cooperatives and Mutuals Leadership Circle (CM50) का पहला बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य दुनिया में समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

इस मंच में दुनिया की कई प्रमुख सहकारी संस्थाओं के नेता शामिल हैं, जिनमें भारत की अमूल के प्रबंध निदेशक जयेन् मेहता, ब्रिटेन की Co-op Group की CEO शिरीन खूरी हक, अमेरिका के CCA Global Partners के चेयरमैन हावर्ड ब्रॉडस्की, ब्राजील की OCB की जनरल मैनेजर फाबियोला दा सिल्वा नाडर मोट्टा, और कनाडा की The Cooperators के CEO रॉब वेसेलिंग शामिल हैं।

यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र के “अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025” (IYC 2025) के समापन समारोह के साथ आयोजित हुआ। सम्मेलन में “दोहा राजनीतिक घोषणा” (Doha Political Declaration) को भी अपनाया गया, जिसमें सहकारी संस्थाओं की भूमिका को सामाजिक और एकजुट अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभ के रूप में मान्यता दी गई। घोषणा में कहा गया कि सहकारी संस्थाएं रोजगार सृजन, सामाजिक न्याय और समुदाय आधारित अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

ICA और COPAC (Committee for the Promotion and Advancement of Cooperatives) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक उच्चस्तरीय सत्र में विभिन्न देशों के प्रमुख, संयुक्त राष्ट्र अधिकारी और सहकारी क्षेत्र के नेता शामिल हुए। इसी सत्र में ICA की नई 2026–2030 रणनीति की भी घोषणा की गई, जिसमें सहकारी आंदोलन को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जोड़ने का रोडमैप प्रस्तुत किया गया।

ICA के अध्यक्ष एरियल गुआर्को ने कहा कि “सहकारी संस्थाओं ने हमेशा निष्पक्ष और मजबूत समाज बनाने की क्षमता दिखाई है। दोहा घोषणा और संयुक्त राष्ट्र की 2025 की रिपोर्ट इस बात को फिर से साबित करती हैं कि सहकारिता एक परिवर्तनकारी मॉडल है, जो सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।”

इस अवसर पर ICA ने वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर की विशेष रिपोर्ट भी जारी की, जिसमें बताया गया कि दुनिया की शीर्ष 300 सहकारी संस्थाओं का संयुक्त कारोबार 2.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है  जो दुनिया की आठवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बराबर है।

1895 में स्थापित ICA विश्वभर की सहकारी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है और लोकतंत्र, समानता और साझा समृद्धि के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करता है। अब “CM50” और “नई वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुबंध” के ज़रिए ICA सहकारी मॉडल को एक न्यायपूर्ण और सतत भविष्य के निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

YuvaSahakar Desk

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