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सहकारी बैंकों को मिला 42,000 करोड़ रुपये का सहारा, केंद्र सरकार ने दी बड़ी राहत

31 मार्च 2025 तक देश में कुल 34 राज्य सहकारी बैंक, 352 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और 1,457 शहरी सहकारी बैंक संचालित हो रहे थे।

Published: 08:42am, 23 Aug 2025

केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान नाबार्ड (NABARD) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) ने मिलकर सहकारी बैंकों में 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि प्रदान की है। यह कदम देश के सहकारी बैंकिंग नेटवर्क को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।

नाबार्ड की ओर से सबसे अधिक लाभान्वित राज्य मध्य प्रदेश रहा, जिसे 4,430 करोड़ रुपये मिले। इसके बाद ओडिशा को 4,113 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 3,655.52 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 2,946.49 करोड़ रुपये और राजस्थान को 2,760.75 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
आंध्र प्रदेश को 2,716.55 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 2,696.26 करोड़ रुपये और गुजरात को 1,691.31 करोड़ रुपये मिले। छोटे राज्यों में सिक्किम को 3.10 करोड़ रुपये, गोवा को 23.97 करोड़ रुपये, नागालैंड को 33 करोड़ रुपये, मिजोरम को 12.60 करोड़ रुपये और मणिपुर को 7.81 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।

वहीं, NCDC की ओर से सबसे बड़ा वितरण आंध्र प्रदेश (3,730 करोड़ रुपये) को किया गया। तेलंगाना को 2,000 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 291 करोड़ रुपये और राजस्थान को 77 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके विपरीत, बिहार, जो पहले वर्षों में बड़ी राशि पाता रहा है, को इस बार NCDC से कोई भी आवंटन नहीं मिला।

मंत्री ने बताया कि देशभर में केवल पश्चिम बंगाल की एक शहरी सहकारी बैंक को छोड़कर बाकी सभी सहकारी बैंक अब कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) प्लेटफॉर्म पर संचालित हो रहे हैं। इससे पारदर्शिता, दक्षता और बेहतर ग्राहक सेवा सुनिश्चित होगी।

सहकारी बैंक भारत में संबंधित राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियमों अथवा बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत होते हैं। बैंकिंग गतिविधि करने पर ये भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियामकीय दायरे में आते हैं और बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त करते हैं।

31 मार्च 2025 तक देश में कुल 34 राज्य सहकारी बैंक, 352 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और 1,457 शहरी सहकारी बैंक संचालित हो रहे थे।

कुल मिलाकर, 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता और लगभग संपूर्ण डिजिटल एकीकरण के साथ, सहकारी बैंकिंग क्षेत्र आने वाले वर्षों में ग्रामीण विकास और किसानों व छोटे व्यवसायों को ऋण सहायता प्रदान करने में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है।

Diksha

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