केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि सहकारिता भारत के समावेशी और सतत विकास में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही है। वे इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा आयोजित कोऑपरेटिव चिंतन शिविर को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम सोमवार को चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने भाग लिया।
अपने संबोधन में गुर्जर ने सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत सहकारी क्षेत्र के तेजी से विस्तार की जानकारी देते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नए और उभरते आर्थिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सरकार ने अब तक 100 से अधिक प्रमुख पहलें शुरू की हैं, जिनमें नई सहकारिता नीति 2025 भी शामिल है। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में प्रत्येक गांव और पंचायत में नए बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (एमपैक्स/MPACS) की स्थापना एक प्रमुख लक्ष्य है। साथ ही, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को केवल ऋण तक सीमित न रखते हुए 25 से अधिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उनकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
गुर्जर ने भारत टैक्सी जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सहकारी मॉडल में मुनाफा सीधे लाभार्थियों, जैसे ड्राइवरों तक पहुंचता है। उन्होंने विश्वास जताया कि सहकारिता क्षेत्र प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, आईसीएआई के अध्यक्ष सीए चरणजीत सिंह नंदा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


