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उपभोक्ता ने बिजली कंपनी को सिखाया सबक, गलत बिलिंग पर मिला ₹15,000 का मुआवजा

भोपाल के उपभोक्ता नीलेश जोशी ने गलत बिजली बिल के खिलाफ जिला उपभोक्ता न्यायालय में जीत हासिल की है। मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को नया बिल जारी करने और ₹15,000 की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया गया है। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है।

Published: 11:00am, 18 Jun 2025

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक साधारण उपभोक्ता ने बिजली कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता न्यायालय में जीत हासिल कर अन्य उपभोक्ताओं के लिए मिसाल कायम की है। हुजूर तहसील के मोरगा गांव निवासी नीलेश जोशी ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (उपभोक्ता न्यायालय) में मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर की थी। उनकी शिकायत थी कि मई 2022 में उनका बिजली बिल ₹480 के बजाय ₹1480 आया, जो सामान्य से कहीं अधिक था।

जोशी ने बताया कि उनके घर में बिजली उपकरण सीमित हैं और प्रत्येक माह उनका बिल ₹300 से ₹500 के बीच ही रहता है। असामान्य बिल देखकर उन्होंने बिजली कंपनी में गलत मीटर रीडिंग की शिकायत दर्ज की, लेकिन कंपनी ने कोई कार्रवाई नहीं की। परेशान होकर उन्होंने उपभोक्ता न्यायालय का रुख किया।

न्यायालय में सुनवाई के दौरान बिजली कंपनी ने तर्क दिया कि उपभोक्ता के घर में बिजली आपूर्ति में कोई कमी नहीं थी और बिल मीटर रीडिंग एवं खपत के आधार पर सही है। हालांकि, उपभोक्ता न्यायालय की अध्यक्ष श्रीमती गिरिबाला सिंह, सदस्य श्रीमती अंजुम फिरोज और श्रीमती प्रीति मुद्गल की पीठ ने कंपनी के तर्क को अस्वीकार कर दिया। पीठ ने कहा कि उपभोक्ता की शिकायत पर कार्रवाई न करना सेवा में कमी (Service Deficiency) दर्शाता है।

न्यायालय ने बिजली कंपनी को आदेश दिया कि वह वास्तविक बिजली खपत के आधार पर नया बिल जारी करे और उपभोक्ता को मानसिक परेशानी के लिए ₹15,000 की क्षतिपूर्ति प्रदान करे। इस फैसले ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के महत्व को रेखांकित किया है।

यह मामला दर्शाता है कि उपभोक्ता न्यायालय उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए एक प्रभावी मंच है। नीलेश जोशी जैसे आम नागरिक की यह जीत अन्य उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा देती है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत प्रत्येक नागरिक को गलत बिलिंग, सेवा में कमी या अन्याय के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का अधिकार है।

न्यायालय ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और किसी भी सेवा प्रदाता की मनमानी के खिलाफ उपभोक्ता न्यायालय में शिकायत दर्ज करें।

YuvaSahakar Desk

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