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त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के लिए केंद्र ने अधिसूचित किए शासन नियम

त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के संचालन संबंधी नियमों की केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। इसमें कुलपति, कुलाधिपति, रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया, कार्यकाल और अधिकारों को स्पष्ट किया गया है।

Published: 17:37pm, 16 Jul 2025

सहकारी शिक्षा (Co-Operative Edudation) और नेतृत्व को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए केंद्र सरकार ने “त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2025” की धारा 33 के तहत विश्वविद्यालय (Tribhuvan Cooperative University) के संचालन से जुड़े विस्तृत नियमों (Rules And Regulation) की अधिसूचना जारी कर दी है। यह अधिसूचना विश्वविद्यालय (Cooperative University) के समग्र प्रशासनिक ढांचे, प्रमुख पदों की नियुक्ति प्रक्रिया, पात्रता मानदंड, कार्यकाल और अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है।

केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, कुलाधिपति (Chancellor) ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे जिनका संबंध सहकारिता, शिक्षा या लोक प्रशासन के क्षेत्र से होगा। उनकी नियुक्ति सहकारिता मंत्रालय द्वारा अनुशंसित एक पैनल के आधार पर की जाएगी। कुलाधिपति को विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर निगरानी रखने के व्यापक अधिकार प्राप्त होंगे, लेकिन वे दोबारा नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे।

कुलपति (Vice-Chancellor) की नियुक्ति खोज-सह-चयन समिति द्वारा अनुशंसित तीन योग्य उम्मीदवारों में से की जाएगी। उम्मीदवार को सहकारिता, शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग या लोक प्रशासन के क्षेत्र में कम-से-कम दस वर्षों का अनुभव होना आवश्यक है। कुलपति का कार्यकाल पांच वर्षों तक या 70 वर्ष की आयु तक सीमित होगा, और वे पुनः नियुक्ति के योग्य नहीं होंगे। कुलपति विश्वविद्यालय की विभिन्न परिषदों की अध्यक्षता करेंगे तथा उन्हें भारत सरकार के सचिव के समकक्ष वित्तीय अधिकार प्राप्त होंगे। पारिश्रमिक सातवें वेतन आयोग के लेवल-17 के अनुसार निर्धारित होगा, जिसमें आवास, चिकित्सा और पेंशन संबंधी विशेष लाभ भी सम्मिलित हैं।

रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी की नियुक्ति पांच वर्ष की अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति या सीधी भर्ती के माध्यम से की जाएगी, जो अधिकतम 62 वर्ष की आयु तक विस्तार योग्य होगी। रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय प्रशासन और अभिलेखों के प्रबंधन में सहायक होंगे, जबकि वित्त अधिकारी बजट, लेखा परीक्षण और निवेश संबंधी मामलों को देखेंगे। दोनों पदों की नियुक्ति, वेतनमान और निष्कासन प्रक्रिया भी स्पष्ट रूप से परिभाषित की गई है।

शासी बोर्ड को हर वर्ष 30 सितंबर तक विश्वविद्यालय की प्रगति और वित्तीय स्थिति की समीक्षा हेतु वार्षिक बैठक आयोजित करने का अधिकार दिया गया है। कार्यकारी परिषद, जिसकी अध्यक्षता कुलपति करेंगे, में नाबार्ड, आरबीआई, एनसीडीसी और आईआरएमए जैसे संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह परिषद विश्वविद्यालय की प्रशासनिक, वित्तीय और सहकारी गतिविधियों से संबंधित निर्णय लेगी।

उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में “आईआरएमए स्कूल” की स्वायत्तता बनाए रखने के लिए एक अलग कार्यकारी बोर्ड की भी स्थापना की जाएगी, जो पाठ्यक्रम, अकादमिक संचालन और भागीदारी को स्वतंत्र रूप से संचालित करेगा।

YuvaSahakar Desk

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