केंद्रीय स्तर सहकारी चुनाव प्राधिकरण (CEA) ने मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज (MSCS) के निदेशक मंडल और पदाधिकारियों के 185 से अधिक चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कर लिए हैं, जबकि सितंबर 2025 तक 67 चुनाव अभी भी प्रक्रियाधीन हैं। कृषि, क्रेडिट और हाउसिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी सहकारी समितियों ने इन चुनावों में सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है, जिससे सहकारी शासन ढांचे को मजबूती मिली है।
सितंबर 2025 में 18 सहकारी समितियों के चुनाव पूरे
केवल सितंबर माह में ही 18 मल्टी-स्टेट सहकारी समितियों ने सफलतापूर्वक अपने चुनाव पूरे किए। इनमें महाराष्ट्र की शांतिश्वर मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी और केरल की किसान मित्र मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं। ये चुनाव सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक और पारदर्शी नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
CEA का गठन और नेतृत्व
CEA का गठन मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 की धारा 45(1) (2023 के संशोधन सहित) के तहत किया गया है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में है। वर्तमान में देवेंद्र कुमार सिंह अध्यक्ष, आर.के. गुप्ता उपाध्यक्ष और महिला प्रतिनिधित्व के लिए अस्थायी सदस्य के रूप में मोनिका खन्ना शामिल हैं।
यह प्राधिकरण चुनावी प्रक्रियाओं की निगरानी, कानून के पालन को सुनिश्चित करने और सहकारी सिद्धांतों की रक्षा करते हुए चुनाव प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए जिम्मेदार है।
ऑनलाइन प्रक्रिया और चुनाव संचालन
चुनाव की प्रक्रिया CRCS पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन से शुरू होती है। मंजूरी के बाद जिला मजिस्ट्रेट जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया जाता है, जो चुनाव को निष्पक्ष तरीके से संचालित करते हैं। CEA मतदाता सूची तैयार करने से लेकर उपनियमों के अनुपालन की निगरानी तक पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखता है।
संशोधित कानूनों के अनुरूप सुधार
CEA प्रमुख सहकारी महासंघों- TRIFED, नेशनल कोऑपरेटिव हाउसिंग फेडरेशन, KRIBHCO आदि के साथ मिलकर कई सुधार लागू कर चुका है। प्रमुख सुधारों में शामिल हैं:
- केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध
- परिवार के सदस्यों के नामांकन पर सीमाएं
- नामांकित निदेशकों के मतदान अधिकारों पर स्पष्टता
- चुनाव व्यय विवरण दाखिल करने की कड़ी अनिवार्यता
बैंकिंग विनियमन अधिनियम में महत्वपूर्ण बदलाव
संशोधित बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत सहकारी बैंकों में निदेशकों के अधिकतम लगातार कार्यकाल को 8 वर्षों से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया गया है। यह प्रावधान 1 अगस्त 2025 से लागू होगा और सहकारी बैंकों में स्थिरता व निरंतरता सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
रिटर्निंग ऑफिसरों को निर्देश दिया गया है कि वे इन संशोधनों को अपने नियुक्ति आदेशों में शामिल करें, जिससे चुनाव अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष हो सकें।
चुनाव पर्यवेक्षकों के लिए नए दिशानिर्देश
सितंबर 2025 में CEA ने चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के लिए व्यापक दिशानिर्देश भी जारी किए हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता और अधिक सुदृढ़ हुई है।


