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देशभर में होगी MP के दूध उत्पादों की ब्रांडिंग, 2030 तक 26 हजार गांवों तक डेयरी नेटवर्क का विस्‍तार

मध्य प्रदेश में पशुपालन और डेयरी सेक्टर को नई दिशा देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि वर्ष 2030 तक प्रदेश के 26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा और 52 लाख किलो दूध का कलेक्शन सुनिश्चित होगा। इसके लिए आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, दुग्ध उत्पादों की राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग, विश्वविद्यालयों में वेटनरी कोर्स और किसानों के लिए समय पर भुगतान की गारंटी जैसे कदम उठाए जाएंगे। इससे पशुपालकों की आय में वृद्धि, डेयरी सेक्टर का विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

Published: 12:42pm, 21 Aug 2025

मध्यप्रदेश के पशुपालकों और किसानों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि आने वाले वर्षों में प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाई पर ले जाया जाएगा। इसके लिए दूध उत्पादन और प्रसंस्करण में आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा और दूध उत्पादों की ब्रांडिंग राष्ट्रीय स्तर पर सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और प्रदेश के दुग्ध संघों की गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक 26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इस विस्तार के बाद प्रदेश में प्रतिदिन 52 लाख किलो दूध संग्रह सुनिश्चित होगा।

डॉ. यादव ने कहा कि बढ़ते दूध उत्पादन का सही उपयोग तभी संभव है जब आधुनिकतम मिल्क प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित हों। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दूध उत्पादों की क्वालिटी को सुनिश्चित करने के साथ उनकी ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए। इससे प्रदेश के पशुपालकों की आय में सीधी बढ़ोतरी होगी और उन्हें राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

वेटनरी शिक्षा और प्रशिक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में वेटनरी पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इससे पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा। साथ ही, वेटनरी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि गोवंश की समुचित देखभाल और स्वास्थ्य प्रबंधन बेहतर तरीके से हो सके।

दुग्ध संघों की गतिविधियां और पारदर्शिता

डॉ. यादव ने कहा कि सभी दुग्ध संघों में एक समान उत्पाद निर्माण के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) अपनाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि दूध उत्पादकों को उनके दूध का मूल्य नियमित और समय पर मिलना चाहिए। इसकी निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।

जिन क्षेत्रों में दुग्ध संघों की पहुंच सीमित है, वहां निजी दूध व्यवसायियों को नवीनतम तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा ताकि स्थानीय स्तर पर भी व्यवसाय मजबूत हो सके।

डिजिटाइजेशन और नवाचार

मुख्यमंत्री ने बताया कि दुग्ध क्षेत्र में डिजिटाइजेशन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इंदौर दुग्ध संघ ने मोबाइल ऐप के जरिए दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की है। वहीं भोपाल में “दूध का दूध-पानी का पानी” अभियान चलाया जा रहा है ताकि उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध उपलब्ध हो सके।

साथ ही दुग्ध संघ द्वारा “सांची भात योजना” शुरू की गई है, जिसके तहत सदस्यों की बेटियों के विवाह पर 11 हजार रुपये, वस्त्र और भात प्रदान किया जाएगा। यह योजना सामाजिक उत्थान के साथ-साथ दुग्ध संघों से जुड़े परिवारों की मदद करेगी

YuvaSahakar Desk

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