भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के अधीन कार्यरत सहकारी चुनाव प्राधिकरण ने बिहार राज्य स्थित बहु-राज्य सहकारी संस्था बिस्कोमान (BISCOMAUN) के शीर्ष पदों के चुनाव को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह मंजूरी झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा एक याचिका को खारिज किए जाने के बाद दी गई है, जिसमें झारखंड सरकार ने बोर्ड से अपने प्रतिनिधि को बाहर किए जाने को चुनौती दी थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवा सहकारी नेता और एनसीसीएफ (NCCF) के चेयरमैन विशाल सिंह को बिस्कोमान का नया अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया है। वे बिहार में लंबे समय से इस पद पर रहे राजद नेता सुनील कुमार सिंह का स्थान ले रहे हैं। वहीं, पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता स्व. नगीना राय के पुत्र महेश राय को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विशाल सिंह ने इस दौरान अपनी फेसबुक वॉल पर जानकारी देते हुए लिखा,
मैं इस समय मैनचेस्टर (यू.के.) में आईसीए ग्लोबल कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस में भाग ले रहा हूँ। इसी बीच पटना से यह सुखद समाचार मिला है कि मुझे बिस्कोमान का अध्यक्ष और श्री महेश राय को उपाध्यक्ष चुना गया है। यह जीत उन सभी सहकारी साथियों की है जिन्होंने हमारे साथ खड़े होकर सहयोग दिया।
इस संबंध में नई दिल्ली स्थित सहकारी चुनाव प्राधिकरण की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चुनाव परिणाम को लेकर अब कोई कानूनी अड़चन शेष नहीं है। आदेश में कहा गया है कि जिला कलेक्टर-सह-रिटर्निंग ऑफिसर (RO) द्वारा दी गई सिफारिशों के आधार पर चुनाव परिणाम को मंजूरी दी गई है। साथ ही, आरओ को बिना किसी देरी के परिणाम घोषित करने और बिस्कोमान के सीईओ को चुनाव परिणाम को संस्था की वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रदर्शित करने का निर्देश भी दिया गया है।
यह निर्णय उस कानूनी विवाद के बाद आया है जिसमें झारखंड सरकार ने WP(C) संख्या 2485/2025 के तहत झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका में राज्य ने दावा किया था कि बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 और बिस्कोमान के उपनियमों के तहत उसे बोर्ड में अपना प्रतिनिधि नामित करने का अधिकार है। परंतु, 1 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि दो राज्यों के बीच अधिकार विवाद संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत आता है और इस पर विचार का अधिकार केवल भारत के सुप्रीम कोर्ट को है।
इसके साथ ही चुनाव प्राधिकरण ने यह निष्कर्ष निकाला कि अब चुनाव परिणाम घोषित करने में कोई बाधा शेष नहीं है और प्रक्रिया को पूर्णता दी जा सकती है।


