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बिहार में फिर शुरू होंगी सकरी और रैयाम चीनी मिलें, सहकारी मॉडल से होगा संचालन

बिहार सरकार ने वर्षों से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को सहकारी मॉडल पर फिर से शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके साथ ही पूरे राज्य में पैक्स को मज़बूत बनाने, कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से ग्रामीणों को 300 से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराने और मेगा फूड पार्क व प्रसंस्करण इकाइयों जैसी नई योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने की व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है।

Published: 12:10pm, 02 Jan 2026

बिहार सरकार ने राज्य में वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर तैयार किए गए नए मास्टर प्लान के अंतर्गत सकरी और रैयाम चीनी मिलों का संचालन अब सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा। सचिवालय स्थित सहकारिता विभाग के कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि दोनों चीनी मिलों को सहकारी मॉडल पर संचालित करने की योजना है। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के बाद कैबिनेट की स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी तथा उसके उपरांत मिलों के संचालन के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस पहल से गन्ना किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा तथा स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

पैक्स सदस्यता और जागरूकता अभियान

राज्य में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो जनवरी से सभी पंचायतों में पैक्स सदस्यता सह जागरूकता अभियान संचालित किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों और ग्रामीणों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ना है, ताकि सहकारिता को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ आधार मिल सके।

सहकारिता मंत्री ने बताया कि विभाग के माध्यम से कुल 25 योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के तहत 114 प्राथमिक सब्जी उत्पादक समितियों में कोल्ड स्टोरेज, ड्राई कोल्ड स्टोरेज, सॉर्टिंग-ग्रेडिंग-पैकिंग यूनिट और प्राथमिक प्रसंस्करण सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

मुंगेर जिले के पांच प्रखंडों में भी इस प्रकार की आधारभूत संरचना के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। साथ ही राज्य के 6292 पैक्सों में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें से 5262 पैक्स पूरी तरह क्रियाशील हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 300 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक पैक्सों के माध्यम से पांच करोड़ रुपये से अधिक का व्यवसाय किया जा चुका है, जबकि स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के जरिए 24 लाभार्थियों को 75 लाख रुपये का गोल्ड लोन प्रदान किया गया है।

नई सहकारी योजनाओं से बढ़ेगी किसानों की आय

सहकारिता विभाग के माध्यम से भविष्य में कई नई योजनाएं शुरू की जाएंगी, जिनमें मेगा फूड पार्क, प्रोसेसिंग यूनिट, पॉली हाउस, रीफर गाड़ियों की खरीद, पैकेजिंग हाउस, डिहाइड्रेशन यूनिट तथा हल्दी एवं टमाटर प्रसंस्करण यूनिट शामिल हैं। इन योजनाओं के लागू होने से कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

सहकारिता मंत्री ने यह भी बताया कि बिहार राज्य फसल सहायता योजना के अंतर्गत अब तक 33.19 लाख किसानों को 2206.84 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सरकार का विश्वास है कि इन पहलों से राज्य की कृषि एवं सहकारिता व्यवस्था को नई गति और मजबूती प्राप्त होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक सुदृढ़ बनेगी।

YuvaSahakar Desk

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