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पूर्वोत्तर भारत में मछली उत्पादन को मिलेगा नया आयाम, चार राज्यों में बनेंगे एकीकृत जलपार्क

पूर्वोत्तर भारत के असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में केंद्र सरकार द्वारा चार एकीकृत जलपार्क स्थापित किए जा रहे हैं। ये जलपार्क मछली उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देंगे और स्थानीय मत्स्यपालकों की आय में वृद्धि करेंगे।

Published: 09:09am, 23 May 2025

केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में चार एकीकृत जलपार्क (Integrated Aqua Parks) स्थापित किए जाएंगे। यह पहल क्षेत्रीय मछुआरों और मत्स्य उद्यमियों की आजीविका को सशक्त करने के साथ-साथ स्थानीय बाजारों में मछली की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।

त्रिपुरा के कैलाशहर में बनने वाले एकीकृत जलपार्क की आधारशिला रखते हुए केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि “पूर्वोत्तर भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों और जल संसाधनों की भरपूर क्षमता है, जिसका उपयोग मछली उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए किया जा सकता है।” इस जलपार्क की स्थापना में ₹42.4 करोड़ का निवेश किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत स्थापित होने वाला त्रिपुरा का यह जलपार्क मछली उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा। यह जलपार्क हैचरी, फीड मिल, कोल्ड स्टोरेज, प्रशिक्षण केंद्र और विपणन सुविधाओं को एकीकृत करेगा, जिससे पूर्वोत्तर के मछुआरों, मछली पालकों और अन्य हितधारकों को व्यापक लाभ मिलेगा। ये जलपार्क क्षेत्र में मत्स्य पालन को क्रांतिकारी रूप से बदलने, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

यह जलपार्क मछली उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को एक छत के नीचे लाकर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न करेगा। इसमें हैचरी, फीड मिल, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट, प्रशिक्षण केंद्र और विपणन सुविधा जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन, त्रिपुरा सरकार के मंत्री श्री सुधांशु दास, और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सहित अन्य स्वीकृति पत्र भी वितरित किए गए।

पूर्वोत्तर भारत में यह पहल न केवल मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि यह क्षेत्र को आत्मनिर्भर मत्स्य अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएगी। केंद्र सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर मत्स्य पालन को टिकाऊ और समावेशी बनाना है, जिससे क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता बढ़े।

YuvaSahakar Desk

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