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दुनिया की नंबर-1 सहकारी संस्था बनी अमूल, IFFCO को मिला दूसरा स्थान

इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) और गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (Amul) ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए GDP प्रति व्यक्ति के अनुपात में टर्नओवर के आधार पर शीर्ष स्थान प्राप्त किया

Published: 16:55pm, 04 Nov 2025

दोहा में विश्व सामाजिक शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (ICA) और यूरोपीय सहकारी एवं सामाजिक उद्यम अनुसंधान संस्थान (EURICSE) ने विश्व सहकारी मॉनिटर (WCM) 2025 रिपोर्ट को जारी किया।

इस 13वें संस्करण में वैश्विक सहकारी आंदोलन की बढ़ती ताकत और उसकी भूमिका को रेखांकित किया गया है। जो लोगों पर केंद्रित, समावेशी और टिकाऊ आर्थिक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार  वर्ष 2023 में विश्व की शीर्ष 300 सहकारी और पारस्परिक उद्यमों ने संयुक्त रूप से 2.79 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का टर्नओवर हासिल किया। इनमें भारत की इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) और गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (Amul) ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए GDP प्रति व्यक्ति के अनुपात में टर्नओवर के आधार पर शीर्ष स्थान प्राप्त किया।

IFFCO ने किसानों को सशक्त बनाने, सतत उर्वरक उत्पादन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और पर्यावरणीय पहल के जरिये सहकारिता की मूल भावना को जीवंत रखा है। संगठन लगातार अपने मुनाफे को सामुदायिक कल्याण, हरित परियोजनाओं और तकनीकी नवाचार में पुनर्निवेश कर रहा है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर सहकारी सफलता का मानक बन चुका है।

वहीं अमूल ने ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सामूहिक स्वामित्व की भावना को मजबूत करते हुए लाखों किसानों के जीवन को बदला है। खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यवसाय में अमूल भारत की सहकारी शक्ति का प्रतीक बन गया है।

वैश्विक स्तर पर रिपोर्ट बताती है कि कृषि (35.7%) और बीमा क्षेत्र (31.7%) सहकारी क्षेत्र में प्रमुख हैं, जबकि थोक और खुदरा व्यापार (18%) तीसरे स्थान पर है। फ्रांस का ग्रुप क्रेडिट एग्रीकोल, अमेरिका का स्टेट फार्म और जर्मनी का REWE ग्रुप शीर्ष स्थानों पर हैं। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जैसे उभरते देशों की सहकारी संस्थाएँ नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और स्थानीय सशक्तिकरण के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

ICA के महानिदेशक जेरोन डगलस ने कहा, “यह रिपोर्ट इस बात को पुष्ट करती है कि सहकारी मॉडल न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी केंद्र में है। हमारा नया ‘प्रैक्टिस, प्रमोट, प्रोटेक्ट (2026–2030)’ मिशन वैश्विक स्तर पर स्थिरता, सामाजिक न्याय और आर्थिक लोकतंत्र को बढ़ावा देने की दिशा में अग्रसर है।”

EURICSE के महासचिव जियानलुका साल्वातोरी ने कहा, “सहकारी संस्थाएँ यह साबित करती हैं कि निष्पक्षता, समावेश और लोकतांत्रिक शासन के साथ नवाचार संभव है। उनका योगदान केवल सामाजिक रूप से नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी टिकाऊ भविष्य के लिए आवश्यक है।”

संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय सहकारी वर्ष के अवसर पर जारी यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि IFFCO और अमूल जैसी संस्थाएँ भारत की सहकारी भावना को विश्व मंच पर नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रही हैं। गाँवों से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक, सहकारिता आज भी सामूहिक प्रयास की सबसे शक्तिशाली ताकत बनकर उभर रही है।

Diksha

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