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2029 तक हर पंचायत में होगी पैक्स की स्थापना, सहकारिता क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा: अमित शाह

केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक देश की प्रत्येक पंचायत में पैक्स स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस योजना के तहत, दो लाख नई पैक्स और डेयरी समितियों का पंजीकरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पैक्स को बहुआयामी बनाने के लिए 22 विभिन्न प्रकार की आर्थिक गतिविधियों को उनके साथ जोड़ा गया है, ताकि उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सके।

Published: 12:37pm, 19 May 2025

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात राज्य सहकारी संघ द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता की भूमिका’ महासम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सहकारिता के ढांचे को मजबूत करने के लिए चरणबद्ध रूप से योजनाएं लागू कर रही है।

अमित शाह ने जानकारी दी कि मोदी सरकार ने त्रिभुवन कोऑपरेटिव यूनिवर्सिटी की स्थापना की है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सहकारिता से संबंधित शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देगी। देश के हर राज्य में कोऑपरेटिव सिद्धांतों पर आधारित शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है, जिससे सहकारिता की जड़ें और मजबूत होंगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब तक प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को मजबूती नहीं मिलेगी, तब तक सहकारिता ढांचे को मजबूत नहीं किया जा सकता। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने 2029 तक देश की प्रत्येक पंचायत में एक नई पैक्स स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत लगभग दो लाख नई पैक्स और डेयरी इकाइयों का पंजीकरण किया जाएगा।

श्री शाह ने बताया कि सरकार ने पैक्सों को बहुआयामी स्वरूप देने हेतु 22 विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को इनसे जोड़ा है। इनमें कृषि इनपुट वितरण, कृषि यंत्र किराए पर देना, गोदाम संचालन, डेयरी, मत्स्य पालन, सोलर एनर्जी सहित कई अन्य क्षेत्र शामिल हैं।

केंद्र सरकार जल्द ही एक नई नीति लेकर आ रही है, जिससे पहले से बीमार पैक्सों का समाधान और उनके स्थान पर नई पैक्सों का गठन किया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई भी पंजीकृत पैक्स वित्तीय संकट में न आए।

उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता, प्रशिक्षण और जनजागरूकता को बढ़ावा देने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में वर्ष 2025 को ‘सहकारिता वर्ष’ घोषित किया गया है और ‘सहकारिता में विज्ञान’ को प्राथमिकता दी जा रही है।

अमित शाह ने कहा कि सहकारी मॉडल के तहत सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए एक सहकारी स्वामित्व वाली कंपनी की स्थापना की जा रही है, जो आइसक्रीम, पनीर, चीनी और दूध से जुड़े उपकरणों का निर्माण करेगी। इसके साथ ही मृत पशुओं की खाल, हड्डियों एवं सींगों के सदुपयोग हेतु भी सहकारी समितियों का गठन किया जा रहा है।

अंत में अमित शाह ने विश्वास जताया कि सहकारिता के इस सशक्त मॉडल के जरिए ‘विकसित भारत’ के निर्माण की नींव मजबूत होगी और देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व मिलेगा।

YuvaSahakar Desk

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