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अमित शाह ने मुंबई में गहन सागरीय मत्स्य नौकाओं का किया लोकार्पण, पीएम मत्स्य संपदा योजना को मिली नई गति

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र आधुनिकीकरण की दिशा में अग्रसर हो रहा है। सहकारिता आधारित विकास मॉडल के माध्यम से तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरा समुदाय की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित की जा रही है।

Published: 12:04pm, 28 Oct 2025

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुंबई के मझगांव डॉक में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत गहन सागरीय मत्स्य नौकाओं का लोकार्पण किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, अजीत पवार तथा केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम भारत के समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण और तटीय क्षेत्रों में सहकारिता आधारित विकास को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने के साथ-साथ ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने और सहकारिता की भावना को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

अमित शाह ने बताया कि जिन दो ट्रॉलरों का लोकार्पण हुआ है, उनसे न केवल भारत की मत्स्य संपदा के दोहन की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि इनसे मिलने वाला मुनाफा सीधे मेहनतकश मछुआरों के घर तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि अब तक ट्रॉलर पर काम करने वाले लोग केवल मजदूरी पर निर्भर रहते थे, लेकिन सहकारी मॉडल लागू होने से मछली पकड़ने से होने वाला लाभ सीधे मछुआरों में बांटा जाएगा।

सहकारिता मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक चरण में 14 ट्रॉलर दिए जाएंगे और आने वाले समय में केंद्र सरकार, सहकारिता मंत्रालय एवं मत्स्य विभाग की ओर से और भी ट्रॉलर सहकारी समितियों के माध्यम से वितरित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ये ट्रॉलर 25 दिन तक गहरे समुद्र में रह सकते हैं और लगभग 20 टन तक मछलियां ढोने की क्षमता रखते हैं। बीच समुद्र में समन्वय के लिए बड़े जहाज भी उपलब्ध रहेंगे जो पकड़ी गई मछलियों को किनारे तक पहुंचाएंगे।

अमित शाह ने कहा कि लगभग 11 हजार किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र में लाखों गरीब मछुआरों की आजीविका इसी पेशे पर निर्भर है और सरकार का लक्ष्य है कि उनका जीवन स्तर सहकारिता के माध्यम से समृद्ध किया जाए। उन्होंने कहा कि सहकारिता का मूल सिद्धांत यही है कि उत्पादन से लेकर मुनाफे तक का स्वामित्व उसी मेहनतकश व्यक्ति के पास रहे जो कार्य करता है। ग्रामीण भारत की आर्थिक सशक्तता से ही राष्ट्र की वास्तविक समृद्धि संभव है।

उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल जीडीपी के आंकड़ों से नहीं मापी जा सकती, बल्कि जब हर परिवार आत्मनिर्भर बनता है, तब ही सही मायने में भारत समृद्ध होता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक स्वावलंबन से युक्त परिवार ही भारत की सामाजिक संरचना को मजबूत करते हैं।

अमित शाह ने कहा कि मत्स्य पालन में भी सहकारिता एक मजबूत आर्थिक आधार बनेगी। भविष्य में प्रोसेसिंग, कलेक्शन और एक्सपोर्ट का कार्य भी सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए मल्टी-स्टेट एक्सपोर्ट कोऑपरेटिव्स की योजना बनाई जा रही है ताकि उत्पाद का पूरा मुनाफा मछुआरों को मिले।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मत्स्य पालन क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। वर्ष 2014-15 में भारत का कुल मत्स्य उत्पादन 102 लाख टन था, जो अब बढ़कर 195 लाख टन तक पहुंच गया है। घरेलू मत्स्य उत्पादन 67 लाख टन से बढ़कर 147 लाख टन हुआ है, जबकि समुद्री मत्स्य उत्पादन 35 लाख टन से बढ़कर 48 लाख टन तक पहुंच गया है। मीठे पानी के मत्स्य उत्पादन में 119 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

अमित शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय का उद्देश्य इस विशाल संभावनाओं वाले क्षेत्र का दोहन कर मुनाफा सीधे मछुआरों तक पहुंचाना है। सरकार एक ऐसा तंत्र विकसित कर रही है जो डेयरी, चीनी मिलों और मंडियों की तरह मछुआरों के लिए भी काम करेगा और उनकी आर्थिक समृद्धि का साधन बनेगा।

उन्होंने कहा कि देश तभी समृद्ध होगा जब हर परिवार को बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के लिए पर्याप्त संसाधन मिलेंगे। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सहकारिता से बड़ा कोई साधन नहीं है। महाराष्ट्र में चीनी मिलों के माध्यम से किसानों को और गुजरात में अमूल के माध्यम से महिलाओं को जो आर्थिक मजबूती मिली है, वही मॉडल अब मत्स्य क्षेत्र में भी लागू किया जाएगा।

YuvaSahakar Desk

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