सहकारिता क्षेत्र ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान किया है। इस आंदोलन ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई बल्कि गांवों में स्थायी विकास का मॉडल तैयार किया है। सामूहिक प्रयास, पारदर्शी व्यवस्था और लाभ के न्यायसंगत वितरण के कारण आज सहकारिता ग्रामीण पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुकी है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने शहरी सहकारी ऋण क्षेत्र के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘सहकारिता कुंभ 2025’ को संबोधित करते हुए सहकारिता मॉडल को ग्रामीण भारत के उत्थान का सशक्त माध्यम बताया। अमित शाह ने कहा कि चपन से उन्होंने डेयरी क्षेत्र के जरिए गांवों में आए जादुई बदलावों को देखा है। उन्होंने बताया कि सहकारिता ने 36 लाख किसानों की आमदनी में वृद्धि की है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है।
अमित शाह ने कहा कि सहकारिता कोई पुरानी अवधारणा नहीं, बल्कि आज के आधुनिक भारत में विकास की नई ऊर्जा बन चुकी है। अमूल और इफको जैसी सहकारी संस्थाओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन ने अमूल को विश्व रैंकिंग में पहला और इफको को दूसरा स्थान दिया है। यह भारत की सहकारी भावना और पारदर्शी कार्यप्रणाली का वैश्विक प्रमाण है।
अमित शाह ने बताया कि आज अमूल “श्वेत क्रांति की जननी” बन गया है, जो 36 लाख किसान सदस्यों, 18 हजार ग्राम समितियों और 18 जिला संघों के माध्यम से देशभर में प्रतिदिन 3 करोड़ लीटर दूध एकत्र करता है। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं ने ग्रामीण जीवन को न केवल समृद्ध किया है बल्कि कृषि आधारित आजीविका को आधुनिक और टिकाऊ बनाया है।
गृह मंत्री ने आगे कहा कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र ने भी ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। सहकारी बैंकों ने छोटे उद्यमों और किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए आर्थिक समावेशन को गति दी है। अब यह क्षेत्र नवाचार, डिजिटलीकरण और पारदर्शी वित्तीय शासन के नए युग में प्रवेश कर रहा है।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय सहकारी ढांचे को नई दिशा दे रहा है, ताकि गांवों तक वित्तीय सशक्तिकरण, पारदर्शिता और डिजिटल पहुंच सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारिता के माध्यम से भारत “विकसित राष्ट्र 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा।


