आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence – AI) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) ने स्कूली शिक्षा (AI in Schools) में AI एजुकेशन (AI Education) को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय ने देशभर के स्कूलों में कक्षा 3 से AI पाठ्यक्रम (Syllabus) शुरू करने की रूपरेखा तैयार की है। यह पहल शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू की जा सकती है।
मंत्रालय का उद्देश्य है कि सभी विषयों के छात्रों को AI के मूल सिद्धांतों, अनुप्रयोगों और सामाजिक प्रभावों से अवगत कराया जाए। यानी विज्ञान, कला या वाणिज्य सभी विषयों के छात्र AI की शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह शिक्षा अनिवार्य होगी या वैकल्पिक विषय के रूप में लागू की जाएगी।
स्कूल शिक्षा सचिव श्री संजय कुमार ने हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी कि “अगले दो से तीन वर्षों में हमें छात्रों और शिक्षकों को AI तकनीक से जोड़ने के लिए तेजी से आगे बढ़ना होगा।” उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती देश के एक करोड़ से अधिक शिक्षकों को AI से संबंधित शिक्षा के लिए तैयार करना होगी।
उन्होंने बताया कि शिक्षकों द्वारा पाठ योजनाएं तैयार करने में AI उपकरणों के उपयोग हेतु एक पायलट परियोजना पहले से ही शुरू की जा चुकी है। मंत्रालय का उद्देश्य शिक्षार्थियों और शिक्षकों दोनों को डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए सशक्त बनाना है।
वर्तमान में, सीबीएसई (CBSE) स्कूलों में कक्षा 6 के बाद AI स्किल शिक्षा दी जा रही है। देशभर के 18,000 से अधिक सीबीएसई स्कूलों में 15 घंटे का मॉड्यूल छात्रों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कक्षा 9 से 12 तक AI को एक वैकल्पिक विषय (Optional Subject) के रूप में पढ़ाया जा रहा है।
AI तकनीक के कारण आने वाले वर्षों में लगभग 20 लाख पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन यदि सही इकोसिस्टम विकसित किया जाए, तो इससे लगभग 80 लाख नई नौकरियों के अवसर पैदा हो सकते हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि समय रहते शिक्षा प्रणाली में AI को शामिल करना न केवल भारत की डिजिटल क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि छात्रों को भविष्य के रोजगार बाजार के लिए भी तैयार करेगा।


