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कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि: भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा भैंस मांस निर्यातक

वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जुलाई 2025) में भारत से कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों का निर्यात 9% की वृद्धि के साथ 7.99 बिलियन डॉलर (66,766 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है। चावल और भैंस के मांस के निर्यात में सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा भैंस मांस निर्यातक बन चुका है, जबकि चावल के वैश्विक व्यापार में 40% से अधिक हिस्सेदारी भारत के पास है।

Published: 13:24pm, 18 Aug 2025

भारत ने कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई 2025) में निर्यात 9% बढ़कर 7.99 बिलियन डॉलर (66,766.5 करोड़ रुपये) दर्ज किया गया। इस तेजी की प्रमुख वजह चावल, भैंस का मांस, फल और सब्जियों के निर्यात में बंपर वृद्धि रही।

चावल के निर्यात में लगातार बढ़त

भारत पिछले एक दशक से दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश बना हुआ है और वैश्विक व्यापार में इसकी हिस्सेदारी 40% से अधिक है।

  • अप्रैल-जुलाई 2025 के बीच चावल का निर्यात (बासमती और गैर-बासमती मिलाकर) 5.2% बढ़कर 3.8 बिलियन डॉलर हो गया।

  • वित्त वर्ष 2024-25 में चावल का निर्यात रिकॉर्ड 12.47 बिलियन डॉलर (1.04 लाख करोड़ रुपये) रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% से अधिक की बढ़ोतरी है।

  • बांग्लादेश ने घरेलू भंडार बढ़ाने के लिए भारत से आयात शुरू किया है, जिससे निर्यात और तेज होने की संभावना है।

बासमती राइस मिलर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, पंजाब के उपाध्यक्ष रणजीत सिंह का कहना है कि म्यांमार और पाकिस्तान में स्टॉक कम होने के कारण वैश्विक खरीदार भारत से ही बड़ी मात्रा में चावल खरीद रहे हैं।

भैंस के मांस का रिकार्ड निर्यात

भारतीय भैंस के मांस की मांग बीते वर्षों में तेजी से बढ़ी है।

  • अप्रैल-जुलाई 2025 में भैंस मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात 22% बढ़कर 1.67 बिलियन डॉलर (13,984 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया।

  • अब भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा भैंस मांस निर्यातक है।

  • भारतीय मांस की सबसे अधिक मांग वियतनाम, मलेशिया, मिस्र, इराक, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में है।

APEDA (एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी) की मान्यता प्राप्त मांस प्रसंस्करण इकाइयों से ही निर्यात की अनुमति दी जाती है, जिन्हें खरीदार देश समय-समय पर निरीक्षण भी करते हैं।

सब्जियों और फलों के निर्यात में भी उछाल

  • वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-जुलाई) में सब्जियों और फलों का निर्यात 11% बढ़कर 1.24 बिलियन डॉलर (10,354 करोड़ रुपये) हो गया।

  • सरकार ने सितंबर 2024 से चावल के निर्यात पर लगी पाबंदियां हटा दी थीं, जिससे बाजार में स्थिरता और किसानों को बेहतर मूल्य मिला।

भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग

अधिकारियों ने बताया कि बीते वर्षों में भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ी है। खासकर केला, आम, प्रोसेस्ड फल और जूस, सब्जियों के बीज और प्रोसेस्ड सब्जियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमुखता से खरीदी जा रही हैं।

APEDA के अधीन उत्पादों का निर्यात 2024-25 में 12% बढ़कर 25.14 बिलियन डॉलर (2.10 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया। यह कुल कृषि निर्यात का लगभग 51% है। अन्य प्रमुख उत्पादों में समुद्री खाद्य, तंबाकू, कॉफी और चाय शामिल हैं।

सरकार का द्रष्टिकोण

सरकार का मानना है कि बेहतर उत्पादन, वैश्विक मांग और निर्यात प्रतिबंधों को हटाए जाने से भारत आने वाले वर्षों में कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यह न केवल किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनेगा बल्कि देश की विदेशी मुद्रा आमदनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।

YuvaSahakar Desk

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