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गाड़ी के बाद अब खाना पकाने में इस्तेमाल होगा एथेनॉल, कुकिंग फ्यूल पॉलिसी लाने की तैयारी में केंद्र

देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ने के बाद सरकार अब इसे खाना पकाने के वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इथेनॉल आधारित कुकिंग फ्यूल के लिए नीति तैयार कर रहा है

Surplus Ethanol Capacity Could Help Reduce India’s LPG Import Dependence


Published: 15:41pm, 20 Jul 2026

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल E20 को लेकर इंजन और माइलेज से जुड़ी शिकायतों की आग पूरी तरह से ठंडी भी नहीं हुई है कि इसी बीच केंद्र सरकार अब एथेनॉल को खाना पकाने के वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा देने की नीति लाने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय एक ऐसा नीतिगत ढांचा तैयार कर रहा है, जिसके जरिए घरों में एलपीजी के साथ एथेनॉल आधारित स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल संभव बनाया जा सके। यह नीति सितंबर तक तैयार हो सकती है। अभी पूरी दुनिया में केन्या, युगांडा, घाना और तंजानिया जैसे अफ्रीकी देशों में ही एथेनॉल का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए किया जा रहा है। किसी बड़े या विकसित देश में एथेनॉल को खाना पकाने के लिए इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा है।

सरकार की प्रस्तावित नीति में एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव को बढ़ावा देने, उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने और ईंधन की मजबूत आपूर्ति शृंखला विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। सब्सिडी पूंजीगत सहायता के रूप में या नियमित वित्तीय प्रोत्साहन के तौर पर दी जा सकती है। तेल विपणन कंपनियां एथेनॉल आधारित स्टोव का परीक्षण और अनुसंधान कर रही हैं। फ्यूल रिटेल आउटलेट पर एथेनॉल एटीएम लगाने का विकल्प भी विचाराधीन है, जहां से उपभोक्ता कनस्तरों में ईंधन प्राप्त कर सकेंगे।

सरकार की इस योजना के पीछे देश में एथेनॉल की बढ़ती उपलब्धता प्रमुख कारण है। भारत की वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर से अधिक हो चुकी है और चालू वित्त वर्ष में लगभग चार अरब लीटर अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की संभावना है। E20 मिश्रण कार्यक्रम में करीब 11 अरब लीटर और अन्य उद्योगों में तीन से साढ़े तीन अरब लीटर की वार्षिक खपत के बाद लगभग सात अरब लीटर अतिरिक्त क्षमता बच सकती है।

खाना पकाने में एथेनॉल के उपयोग से भारत की आयातित एलपीजी पर निर्भरता और विदेशी मुद्रा खर्च कम हो सकता है। हालांकि, इस योजना की सफलता एथेनॉल की कीमत, स्टोव की सुरक्षा, वितरण व्यवस्था और उपभोक्ताओं के लिए इसकी वास्तविक किफायत पर निर्भर करेगी। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ई-कुकिंग और बायोगैस अपनाने से भारत 2050 तक एलपीजी सब्सिडी पर कुल मिलाकर 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत कर सकता है।

अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन को बढ़ाने के लिए खाद्य मंत्रालय ने सप्लाई वर्ष 2026-27 के लिए डिस्टिलरियों को भारतीय खाद्य निगम के आधिकारिक स्टॉक से 72 लाख टन चावल आरक्षित किया है जो 2025-26 आपूर्ति वर्ष में आवंटित 52 लाख टन से अधिक है। इसके साथ ही 55 लाख टन टूटे चावल को भी ई-नीलामी के जरिए बेचने की मंजूरी दी गई है। सरकार के इस कदम से देश में एथेनॉल उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा।यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को FCI के चावल से बने एथेनॉल को ₹58.5 प्रति लीटर की दर से खरीदना अनिवार्य है। टूटे चावल से उत्पादित एथेनॉल के लिए खरीद मूल्य बढ़कर ₹64 प्रति लीटर हो जाता है। चूंकि ई-नीलामी के माध्यम से बेचे जाने वाले FCI के 100 प्रतिशत टूटे चावल के उपयोग को नियंत्रित करने वाला कोई प्रतिबंध या तंत्र नहीं है, इसलिए उद्योग सूत्रों का कहना है कि इसे भी एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे डिस्टिलरी की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।

Jitendra