उत्तर प्रदेश के किसानों को दीवाली से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक, आत्मनिर्भर और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से 4000 करोड़ रुपये की उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट (यूपी एग्रीज) को लागू करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम का निर्माण किया जाएगा जिसमें फसल, मौसम, बीज, सिंचाई, उर्वरक, बीमा, बाजार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सभी सूचनाएं एकीकृत प्लेटफॉर्म पर रियल टाइम उपलब्ध होंगी।
डिजिटल कृषि नीति बनेगी
सीएम योगी ने अपने सरकारी आवास पर यूपी एग्रीज परियोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश के लिए राष्ट्रीय मानकों पर आधारित डिजिटल कृषि नीति तैयार की जाए, जो सुरक्षित साइबर ढांचा और नवाचार आधारित अनुसंधान को बढ़ावा दे।
बीज से बाजार तक एकीकृत प्रणाली
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीज से लेकर बाजार तक की प्रक्रिया को एक साथ जोड़ते हुए यह परियोजना किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और तकनीकी रूप से उन्नत कृषि प्रणाली विकसित करने में मदद करेगी। उन्होंने कृषि से उद्योग तक की सोच के साथ मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन पर जोर दिया।
4000 करोड़ रुपये की विश्व बैंक समर्थित परियोजना
अधिकारियों ने बताया कि विश्व बैंक के सहयोग से 4000 करोड़ रुपये की यह परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के 28 जिलों में अगले छह वर्षों में लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य बदलते जलवायु के अनुरूप कृषि उत्पादन बढ़ाना, संसाधनों का कुशल उपयोग करना और किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ना है।
कृषि क्लस्टर से बढ़ेगी उत्पादकता
परियोजना के तहत बुंदेलखंड में मूंगफली, वाराणसी में लाल मिर्च व सब्जी, बाराबंकी से आज़मगढ़ के बीच केला, कालानमक चावल, हरी मटर, उड़द और आलू के क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने केले की खेती को बढ़ावा देने के लिए टिशू कल्चर तकनीक को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया।
मत्स्यपालन में आत्मनिर्भरता
मत्स्य क्षेत्र की समीक्षा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि मछली के सीड प्रदेश में ही तैयार किए जाएं, जिससे मत्स्यपालकों की लागत घटेगी। परियोजना के तहत 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और एक लाख परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।
छोटे किसानों को ऋण और तकनीकी सहयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण सुविधा, जोखिम प्रबंधन और निजी निवेश को बढ़ावा देने की व्यवस्था की जाए। साथ ही उन्हें तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाओं से जोड़ा जाए।
अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से साझेदारी
परियोजना के तहत अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के साथ छह वर्षीय उत्पादकता कार्यक्रम के लिए अनुबंध हो चुका है। वहीं तकनीकी सहायता और मॉनिटरिंग एजेंसियों का चयन भी अंतिम चरण में है।
नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने यूपी एग्रीज की नियमित मॉनिटरिंग और इसके प्रत्यक्ष लाभ किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।


