देश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक अहम नीतिगत फैसले के तहत केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 21 जनवरी 2026 को अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही योजना के प्रचार विकासात्मक गतिविधियों और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए गैप फंडिंग हेतु सरकारी वित्तीय सहायता को भी आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले से कम आय वर्ग और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों की वृद्धावस्था आय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। विस्तारित ढांचे के तहत जागरूकता अभियानों, क्षमता निर्माण और वित्तीय व्यवहार्यता से जुड़े अंतर को पाटने के लिए सहायता जारी रहेगी, जिससे योजना की पहुंच और टिकाऊपन बढ़ेगा।
मई 2015 में शुरू की गई अटल पेंशन योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद लाभार्थियों को 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन की गारंटी दी जाती है। यह योजना पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा संचालित की जाती है और बैंकों व डाक विभाग के नेटवर्क के माध्यम से लागू की जाती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एपीवाई के अंतर्गत अब तक 8.34 करोड़ से अधिक नामांकन हो चुके हैं। युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इसमें विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है। बहुभाषी जागरूकता अभियानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग और राज्य स्तरीय बैंकिंग समितियों के सहयोग से योजना को व्यापक स्वीकार्यता मिली है।
इस विस्तार में सहकारी बैंकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति और स्थानीय समुदायों के साथ भरोसेमंद संबंधों के चलते सहकारी बैंकों ने पेंशन साक्षरता की उस कमी को पाटा है, जहां बड़े वाणिज्यिक बैंक अक्सर सीमित पहुंच रखते हैं। श्री महिला सेवा सहकारी बैंक, आंध्र प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक, साउथ कैनरा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक सहित कई संस्थानों ने एपीवाई नामांकन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और कई मामलों में निर्धारित लक्ष्यों से 100 प्रतिशत से अधिक प्रदर्शन किया है।
सहकारी बैंक किसानों, कारीगरों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों और छोटे व्यापारियों जैसे वर्गों के साथ गहरे स्तर पर जुड़े हुए हैं, जो असंगठित क्षेत्र की रीढ़ हैं। इसी सामुदायिक दृष्टिकोण के कारण महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है, जिसमें सहकारी संस्थाओं और उनसे जुड़े स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका रही है।
हाल ही में आयोजित सम्मान समारोहों में PFRDA अधिकारियों ने सहकारी क्षेत्र के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ये बैंक न केवल लक्ष्य पूरे करते हैं, बल्कि उन क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम करते हैं जहां औपचारिक वित्तीय समावेशन सबसे चुनौतीपूर्ण होता है। उनके प्रयास अटल पेंशन योजना को सार्वभौमिक पेंशन कवरेज के लक्ष्य के करीब ले जाने में सहायक हैं, जो विकसित भारत @2047 की परिकल्पना से भी मेल खाते हैं।
कैबिनेट के नए समर्थन और सहकारी बैंकिंग नेटवर्क की निरंतर सक्रियता के साथ, अटल पेंशन योजना के आने वाले वर्षों में और अधिक विस्तार की उम्मीद है, जिससे देश के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की सेवानिवृत्ति सुरक्षा और मजबूत होगी।


