भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए जारी राज्य सहकारी बैंकों और जिला सहकारी बैंकों की वित्तीय रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेष रूप से लाभ, वसूली दर और एनपीए नियंत्रण जैसे प्रमुख वित्तीय मानकों में प्रदेश ने कई अन्य बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सहकारी बैंकों का लाभ वित्त वर्ष 2023-24 में 73 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस प्रकार लाभ में लगभग 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं एनपीए अनुपात 3.1 प्रतिशत से घटकर 2.7 प्रतिशत पर आ गया है, जो राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत की तुलना में काफी बेहतर है। वसूली दर भी 98.4 प्रतिशत दर्ज की गई, जो देश के अधिकांश बड़े राज्यों से अधिक है।
जिला सहकारी बैंकों ने भी दर्ज की बड़ी उपलब्धि
प्रदेश के 50 जिला सहकारी बैंक भी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ लाभ में रहे। पिछले वित्त वर्ष में लगभग 7 बैंक घाटे में थे, जबकि वर्ष 2024-25 में सभी बैंक लाभ में आ गए। इनका कुल लाभ 11 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 186 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। एनपीए अनुपात 6.3 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत पर आ गया, जबकि वसूली दर 79.3 प्रतिशत से बढ़कर 81.2 प्रतिशत हो गई, जो राष्ट्रीय औसत 76.4 प्रतिशत से अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि प्राथमिक स्तर पर ऋण गुणवत्ता और वसूली प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
पश्चिमी और मध्य यूपी का प्रदर्शन बेहतर
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष पांच लाभ अर्जक राज्यों में शामिल है। हालांकि महाराष्ट्र की तुलना में लाभ अभी कम है, लेकिन वृद्धि दर लगातार मजबूत बनी हुई है। आरबीआई ने उल्लेख किया है कि यूपी की वसूली दर देश में शीर्ष श्रेणी की है, जो ग्रामीण क्रेडिट प्रणाली की मजबूती और सुशासन का संकेत है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के बैंकों का प्रदर्शन विशेष रूप से बेहतर रहा है।


