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भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ मुक्त व्यापर समझौता, भारत से 100% निर्यात पर जीरो टैरिफ

भारत और न्यूजीलैंड के बीच रिकॉर्ड 9 महीनों में संपन्न हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। इस समझौते से भारत को 100% निर्यात पर शून्य टैरिफ बाजार पहुंच, सेवाओं में अभूतपूर्व अवसर और निवेश में दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

Published: 12:37pm, 23 Dec 2025

भारत (India) और न्यूजीलैंड (India-New Zealand FTA) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) पर सहमति बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और न्यूजीलैंड (New Zealand) के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच फोन वार्ता के बाद इस समझौते की औपचारिक घोषणा की गई। मार्च 2025 में शुरू हुई वार्ताओं के बाद मात्र 9 महीनों के रिकॉर्ड समय में यह समझौता पूरा हुआ है।

यह समझौता भारत और न्यूजीलैंड (India-New Zealand FTA) दोनों के लिए परस्पर लाभकारी साबित होगा। आने वाले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह निवेश कृषि, शिक्षा, फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप्स और नवाचार क्षेत्रों में केंद्रित रहेगा।

यह निवेश भारत के ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को मजबूती प्रदान करेगा तथा रोजगार सृजन और कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

न्यूजीलैंड के साथ हुआ यह समझौता भारत का सातवां प्रमुख मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत ओमान, यूनाइटेड किंगडम (यूके), यूरोपीय फ्री ट्रेड ब्लॉक (EFTA), संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस के साथ एफटीए कर चुका है। लगातार कई देशों के साथ एफटीए करने के बाद भारत वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और स्थिर व्यापारिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

100% निर्यात पर जीरो टैरिफ का लाभ

इस एफटीए का सबसे बड़ा लाभ यह है कि भारत के 100 प्रतिशत निर्यात को न्यूजीलैंड के बाजार में शून्य टैरिफ पर पहुंच मिलेगी। न्यूजीलैंड ने भारत के लिए अपनी सभी टैरिफ लाइनों पर शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इससे भारतीय निर्यातकों को व्यापक बाजार पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इस समझौते से बड़ा लाभ होने की संभावना है। कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग उत्पाद और ऑटोमोबाइल सेक्टर को इस एफटीए से नई ऊर्जा मिलेगी। जिन भारतीय निर्यातकों को अमेरिका और अन्य बाजारों में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था, उनके लिए न्यूजीलैंड एक मजबूत वैकल्पिक बाजार बनकर उभरेगा।

सेवाक्षेत्र में अभूतपूर्व अवसर

सेवाओं के क्षेत्र में न्यूजीलैंड ने भारत को अब तक का सबसे बेहतर बाजार पहुंच प्रस्तावित किया है। इस समझौते के तहत 118 सेवा क्षेत्रों में भारत को अवसर मिलेंगे, जिनमें कंप्यूटर एवं आईटी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, ऑडियो-विजुअल सेवाएं, दूरसंचार, निर्माण, पर्यटन और यात्रा से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, न्यूजीलैंड ने लगभग 139 सब-सेक्टर्स में भारत को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) का दर्जा देने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे भारतीय सेवा प्रदाताओं को न्यूजीलैंड के बाजार में समान और निष्पक्ष अवसर प्राप्त होंगे।

छात्रों और पेशेवरों के लिए नई राहें

एफटीए में लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया है। समझौते के तहत पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा, छात्रों की आवाजाही और न्यूजीलैंड में रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। न्यूजीलैंड ने 5,000 भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा का समर्पित कोटा और 1,000 वर्क एंड हॉलीडे वीजा की पेशकश की है। इससे भारतीय युवाओं और कुशल कामगारों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

कृषि और किसानों के हितों की सुरक्षा

भारत सरकार ने इस समझौते में किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की है। डेयरी, कॉफी, दूध, क्रीम, पनीर, दही, व्हे, केसिन, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को बाजार पहुंच से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि डेयरी क्षेत्र भारत के लिए पूरी तरह “रेड लाइन” है और इस पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है। डेयरी क्षेत्र करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से जुड़ा हुआ है और इसे राजनीतिक तथा सामाजिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। यही कारण है कि भारत ने अपने सभी व्यापार समझौतों में बल्क डेयरी आयात के लिए बाजार खोलने से परहेज किया है।

वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, न्यूजीलैंड से भारत को होने वाला डेयरी निर्यात मात्र 10.7 लाख डॉलर रहा है, जो कुल व्यापार के मुकाबले नगण्य है। इसके बावजूद भारत सरकार ने इस क्षेत्र में किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है।

कृषि उत्पादकता और साझेदारी

एफटीए के तहत न्यूजीलैंड भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए सेब, कीवी और शहद के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना करेगा। इसके माध्यम से एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी पार्टनरशिप को मजबूती मिलेगी और आधुनिक तकनीक, अनुसंधान एवं सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान संभव होगा।

इस समझौते की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इसकी जानकारी साझा की तथा न्यूजीलैंड सरकार ने भी प्रेस विज्ञप्ति जारी की। दोनों देशों के बीच यह साझेदारी Indo-Pacific क्षेत्र में स्थिरता एवं समृद्धि को बढ़ावा देगी। सरकार का मानना है कि यह FTA भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने शिक्षा, खेल, पर्यटन और लोगों के बीच आपसी संपर्क को भी इस नई साझेदारी का अभिन्न हिस्सा बताया। दोनों देशों ने नागरिकों की आपसी आवाजाही आसान बनाने और युवाओं को नए आयामों में अवसर प्रदान करने पर सहमति जताई है।

YuvaSahakar Desk

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