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कारगिल में NDDB स्थापित करेगा सोलर डेयरी प्लांट, सेना के जवानों को मिलेगा ताजा दूध

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) कर्गिल में पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलने वाला 10,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला डेयरी प्लांट स्थापित कर रहा है, जो स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने के साथ भारतीय सेना के लिए ताजा दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।

Published: 10:59am, 09 Dec 2025

लद्दाख और कारगिल जैसे अत्यंत कठिन व दुर्गम इलाकों में तैनात भारतीय सेना के जवानों को अब ताजा और पौष्टिक दूध उपलब्ध कराने की दिशा में देश ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) कारगिल में पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित दूध प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित कर रहा है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 10,000 लीटर होगी। यह प्लांट सेना की आपूर्ति प्रणाली को मजबूत करेगा और स्थानीय किसानों को स्थायी आय का नया अवसर प्रदान करेगा।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ताजा खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। बर्फबारी, अत्यधिक ठंड और -20°C तक गिरते तापमान के कारण यहां दूध जैसे नाशवान उत्पादों को सुरक्षित रखना कठिन होता है। कई स्थानों पर भू-भाग 23,000 फीट तक ऊंचा है, लेकिन सालभर तेज धूप उपलब्ध रहने से सौर ऊर्जा का प्रभावी उपयोग संभव है। इसी क्षमता का लाभ उठाते हुए NDDB ने कारगिल में उच्च-ऊंचाई सोलर डेयरी प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है।

NDDB के चेयरमैन मीनश शाह के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 1,500 स्थानीय किसानों को जोड़ा जाएगा। इन किसानों का दूध सीधे सेना तक पहुंचेगा, जिससे उन्हें स्थायी बाज़ार और बेहतर दाम सुनिश्चित होंगे। वर्तमान में NDDB लद्दाख के 27 गांवों के 1,200 किसानों से प्रतिदिन लगभग 9,000 लीटर दूध खरीद रहा है। नए प्लांट के शुरू होने पर यह क्षमता और बढ़ेगी।

सेना के लिए यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। लद्दाख, लेह, नुब्रा घाटी और सियाचिन बेस कैंप जैसे इलाकों में अभी तक जवानों को अधिकतर टेट्रा पैक दूध मिलता था। लंबे समय से जवान ताजा दूध की कमी की शिकायत करते रहे हैं। सेना को इन क्षेत्रों में प्रतिदिन लगभग 20,000 लीटर दूध की आवश्यकता होती है। लेह में पहले से संचालित 5,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट के साथ नया कारगिल प्लांट सेना की आवश्यकताओं को बड़े स्तर पर पूरा करेगा।

स्थानीय किसानों के लिए भी यह परियोजना एक बड़ा अवसर लेकर आई है। कई गांवों में दूध उत्पादन तो होता था, लेकिन खरीददार की कमी के कारण किसानों को दूध कम कीमत पर बेचना पड़ता था या कभी-कभी फेंकना पड़ता था। NDDB ने जापानी कंपनी सुजुकी के साथ मिलकर विशेष मोबाइल मिल्क कलेक्शन वैन विकसित की है, जो गांवों में जाकर दूध एकत्र करती है, वहीं टेस्ट करती है और तुरंत ठंडा कर देती है। इससे किसानों को डेयरी तक लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती।

लगभग 25 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा NDDB को 12.6 करोड़ रुपये की ग्रांट प्रदान की जा रही है। NDDB की योजना है कि भविष्य में लद्दाख जैसे अन्य दुर्गम क्षेत्रों में भी ऐसे सोलर डेयरी प्रोजेक्ट स्थापित किए जाएं। NDDB पहले ही केरल के कोच्चि और मणिपुर में सेना व सुरक्षा बलों को ताजा दूध आपूर्ति कर रहा है। कारगिल परियोजना इस अभियान को और गति देगी।

सरकार और NDDB का यह संयुक्त प्रयास न केवल सेना की सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय किसानों की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार लाएगा। NDDB के चेयरमैन मीनश शाह ने कहा कि सौर ऊर्जा आधारित यह डेयरी प्रोजेक्ट उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सतत विकास का एक ऐतिहासिक मॉडल सिद्ध होगा।

YuvaSahakar Desk