केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर सम्मेलन केंद्र में आयोजित ‘एम्पावरिंग रुरल इनोवेशन फॉर ग्लोबल चेंज’ अर्थ समिट को संबोधित करते हुए सरकार की एक निश्चित रणनीति के तहत सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आगामी कुछ वर्षों में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सहकारिता क्षेत्र के योगदान को तीन गुना बढ़ाने तथा 50 करोड़ से अधिक सक्रिय सहकारी सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार वर्ष 2030 तक वैश्विक जैविक बाजार में भारत का हिस्सा 20 प्रतिशत और वर्ष 2035 तक 40 प्रतिशत तक पहुँचाने का लक्ष्य हासिल करेगी। इसके लिए देशभर में जैविक कृषि, प्राकृतिक खेती, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण विकास, खेती, पशुपालन और सहकारिता क्षेत्र को देश के आर्थिक ढांचे का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। भविष्य के संपूर्ण आर्थिक विकास में सहकारिता को ग्रामीण सशक्तिकरण, किसानों की आय वृद्धि और स्थानीय उत्पादन प्रणालियों के विस्तार से जोड़ा जा रहा है।
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि देश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक सहकारी संस्था स्थापित की जाएगी। इसके माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता, किसानों के उत्पाद एवं सेवाओं के प्रबंधन को बेहतर ढंग से सुगठित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बनास डेयरी मॉडल ने डेयरी अर्थव्यवस्था में संसाधनों के अधिकतम उपयोग का एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसे अब पूरे देश में लागू करने की दिशा में पहल की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में लगभग 49 लाख किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं और इसमें भविष्य के लिए व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि भारत ऑर्गेनिक्स और अमूल ऑर्गेनिक के सहयोग से जैविक परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं का राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। वर्तमान में गेहूं, चावल सहित लगभग 40 जैविक उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।
अमित शाह ने कहा कि किसानों से जैविक उत्पाद खरीदने तथा उन्हें बाजार में उपलब्ध कराने के लिए दो बहु-राज्य सहकारिताओं का गठन किया गया है। किसानों की आय सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी जिससे बिचौलिया व्यवस्था को समाप्त किया जा सके।
उन्होंने बताया कि सहकारी टैक्सी सेवा के अंतर्गत देशभर के करीब 51 हजार ड्राइवर पहले ही अपना पंजीकरण करा चुके हैं। इस मॉडल के अंतर्गत टैक्सी चालक अपनी पूरी आय सीधे बैंक खाते में प्राप्त करेंगे। भविष्य में यह भारत की सबसे बड़ी सहकारी टैक्सी सेवा के रूप में उभरने की संभावना है। इसके साथ ही सहकारी बीमा सेवा को भी राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है। देशभर के गांवों में तीन युवाओं को सहकारी बीमा एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया जाएगा जिसका उद्देश्य बीमा कवरेज को ग्रामीण स्तर तक विस्तारित करना है।
सम्मेलन में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि गुजरात सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी आवश्यक पहल कर रही है। सर्कुलर इकोनॉमी, प्राकृतिक खेती, ग्रीन ग्रोथ, जलवायु परिवर्तन, पशुपालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अर्थ समिट में दस हजार से अधिक प्रतिनिधि, 1200 कॉरपोरेट, 500 विशेषज्ञ, 300 स्टार्टअप तथा 30 से अधिक मास्टर क्लास में तकनीकी हस्तक्षेप और नवाचार को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की गई। नाबार्ड द्वारा ग्रामीण सहकारी संस्थाओं के लिए सहकार सारथी पोर्टल विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से सहकारी संस्थाओं को सॉफ्टवेयर, डेटा स्टोरेज, केवाईसी और डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन की सुविधा प्रदान की जाएगी।


