अर्थ समिट 2025 का आयोजन 5 दिसंबर 2025 को गांधीनगर, गुजरात में हुआ। यह कार्यक्रम नाबार्ड द्वारा सहकारिता मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य फोकस था— “वैश्विक परिवर्तन हेतु ग्रामीण नवाचार का सशक्तिकरण।”
इस समिट में माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय वे तीन मंत्रालय हैं जो देश की लगभग 80% आबादी के भविष्य और भारत के विकास की दिशा तय करते हैं। उन्होंने बताया कि 2014 में इन तीनों मंत्रालयों का कुल बजट लगभग 1,20,000 करोड़ रुपये था, जिसे मोदी सरकार ने बढ़ाकर 2025-26 में 3,15,186 करोड़ रुपये कर दिया है।
यह बढ़ा हुआ बजट ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने और विकास को तेज गति देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अर्थ समिट में अमित शाह द्वारा ‘सहकार सारथी’ नामक एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का शुभारंभ भी किया गया। सहकारिता मंत्रालय और नाबार्ड की इस संयुक्त पहल का उद्देश्य देश के सहकारी बैंकिंग नेटवर्क को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।
‘सहकार सारथी’ के माध्यम से ग्रामीण सहकारी बैंकों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म मिलेगा, जिसमें इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई सुविधाएँ, साइबर सुरक्षा और अन्य आधुनिक सेवाएँ शामिल होंगी। यह पहल ग्रामीण बैंकिंग को डिजिटल युग से जोड़ने वाली एक बड़ी कदम के रूप में देखी जा रही है।
अमित शाह ने कहा कि अर्थ समिट 2025 का व्यापक लक्ष्य भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, नए रोजगार अवसर पैदा करना और ग्रामीण क्षेत्रों को देश की आर्थिक संरचना का मजबूत आधार बनाना है। इस समिट ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख प्रेरक बनने जा रहा है।


