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महिला सशक्तिकरण के नए आयाम लिख रहा उत्तर प्रदेश, 18.56 लाख महिलाएं बनी लखपति दीदी

जिस महिला सदस्य की वार्षिक पारिवारिक आय कम-से-कम चार कृषि मौसमों/चार व्यापार चक्रों में औसतन एक लाख रुपये या अधिक बनी रहती है, उसे ‘लखपति दीदी’ माना जाता है । इस मानक से आय की टिकाऊ प्रकृति, जोखिम प्रबंधन और परिवार की वित्तीय सुरक्षा पर प्रभाव सुनिश्चित होता है ।

Published: 15:44pm, 03 Dec 2025

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर चल रही लखपति दीदी योजना उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परिवर्तन का प्रमुख स्तंभ बन गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 तक प्रदेश की 18.56 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। ये महिलाएं प्रतिवर्ष एक लाख रुपये या उससे अधिक की नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार देखा गया है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक 28.92 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का विस्तृत खाका तैयार कर लिया है। इस दिशा में 35.94 लाख महिलाओं की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 29.68 लाख महिलाओं की आय संबंधी जानकारी डिजिटल आजीविका रजिस्टर में दर्ज है। सरकार का कहना है कि निर्धारित सभी लक्ष्य समय पर पूरे किए जाएंगे।

राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप तेज़ प्रगति

केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 तक पूरे देश में दो करोड़ स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों को सालाना एक लाख रुपये से अधिक आय वर्ग में लाने का लक्ष्य तय किया है। इसी के अनुरूप उत्तर प्रदेश के लिए 28.92 लाख महिलाओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार ने घोषित किया है कि 18.56 लाख महिलाओं का लक्ष्य समय से पहले प्राप्त कर लिया गया है और शेष 10.36 लाख महिलाओं को भी वर्ष 2027 तक लखपति बनाने का संकल्प निर्धारित समयसीमा में पूरी तरह हासिल कर लिया जाएगा।

ग्रामीण परिवारों में आया संरचनात्मक बदलाव

प्रदेश में 98.49 लाख ग्रामीण महिलाओं को 8,96,618 स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। ये समूह 62,958 ग्राम संगठनों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हैं, जिससे उत्पादों की मार्केटिंग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता की व्यवस्था सुदृढ़ बनी है। महिलाएं खेती-बाड़ी, डेयरी, बकरी एवं मुर्गी पालन, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और सेवा आधारित लघु उद्यमों के माध्यम से स्थायी आय अर्जित कर रही हैं।

लक्ष्य केवल कमाई नहीं, आय की स्थिरता

सरकार का स्पष्ट उद्देश्य एक बार की आय वृद्धि नहीं, बल्कि लगातार तीन वर्षों तक चार तिमाहियों में आय को एक लाख रुपये से ऊपर बनाए रखना है। इसे ही वास्तविक आर्थिक सशक्तिकरण का आधार माना गया है। इसी दिशा में प्रशिक्षण, बाजार लिंकिंग और वित्तीय सहायता की व्यापक व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

YuvaSahakar Desk