राजस्थान के सहकारिता क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। राज्य में मात्र सात महीनों के भीतर 1,700 नई मल्टी-पर्पज प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (M-PACS) का गठन किया गया है, जिससे ग्रामीण ऋण व सेवा वितरण नेटवर्क को मजबूत आधार मिला है।
यह विस्तार उन पंचायतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है, जहां पहले PACS की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
सिर्फ सात महीनों में दो साल का 65% लक्ष्य पूरा
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने दो वर्ष के लक्ष्य का 65% हिस्सा मात्र सात महीनों में पूरा कर लिया है। वर्ष 2024–25 के दौरान 297 नई PACS स्थापित करने का लक्ष्य था, जबकि अब तक 857 समितियाँ बन चुकी हैं, जो असाधारण गति को दर्शाता है।
8,823 कार्यरत PACS के साथ राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी
तेजी से बढ़ते सहकारी ढांचे के साथ राजस्थान अब 8,823 सक्रिय PACS के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय सहकारी नीति के अनुरूप जमीनी स्तर पर सहकारिता को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि M-PACS के तेज़ी से गठन से किसानों को ऋण, कृषि सेवाएँ, खाद-बीज, कृषि उपकरण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहले से अधिक सरलता से मिल पा रहा है। इससे ग्रामीण समुदायों में आर्थिक सशक्तिकरण बढ़ा है और सहकारिता व्यवस्थाओं की दक्षता भी मजबूत हुई है।


