एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण सहकारी बैठकों में से एक 17वीं एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय महासभा और ICA-AP बोर्ड चुनाव (24–28 नवंबर 2025) में भारतीय सहकारी आंदोलन ने मजबूत और सामूहिक उपस्थिति दर्ज कराई है। भारत के राष्ट्रीय महासंघों, शीर्ष संस्थाओं और प्रमुख राज्य-स्तरीय सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि कोलंबो में पहुँचे हैं।
इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहकारी प्रतिनिधियों की भागीदारी की संभावना है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव और ICA-AP क्षेत्रीय निदेशक बालू अय्यर की सहभागिता से इस महासभा का महत्व और बढ़ गया है।
26 नवंबर को होगा आधिकारिक उद्घाटन
महासभा का आधिकारिक उद्घाटन 26 नवंबर को होगा, जहाँ श्रीलंका के वाणिज्य, खाद्य सुरक्षा एवं सहकारिता विकास मंत्री वसंथ समरसिंघे मुख्य संबोधन देंगे।
भारत का मजबूत प्रतिनिधिमंडल
भारत से IFFCO, KRIBHCO, NCUI सहित कई राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय सहकारी संस्थाओं के नेता बड़ी संख्या में पहुँचे हैं। इस साल भारत की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ICA-AP बोर्ड चुनावों में भारतीय प्रतिनिधि निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं।
जानकारी के अनुसार, लगभग 25 भारतीय मतदाताओं ने IFFCO के तरुण भार्गव और NCUI की उप मुख्य कार्यकारी सवित्री सिंह को अधिकृत किया है, जो 27 नवंबर को भारत की ओर से मतदान करेंगे।
भारत से डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ICA-AP अध्यक्ष पद के लिए पुनः चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
तीन–तरफा मुकाबला: उपाध्यक्ष पद
इस वर्ष के चुनावों में अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, और क्षेत्रीय बोर्ड के सदस्य चुने जाएंगे। जहाँ अध्यक्ष पद पर डॉ. यादव पुनः उम्मीदवार हैं, वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए तीन देशों के बीच कड़ा मुकाबला है— अदिली वुबुली (चीन), दातुक सेरी डॉ. अब्दुल फात्ताह अब्दुल्ला (मलेशिया), अब्देलफत्ताह अल-शलाबी (जॉर्डन)
तीनों में से दो का चयन किया जाएगा, जो चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित भाग माना जा रहा है।
क्षेत्रीय बोर्ड सदस्य: सभी प्रत्याशी निर्विरोध
ICA-AP के क्षेत्रीय बोर्ड की आठ सीटों के लिए ईरान, फिलिस्तीन, जापान, श्रीलंका, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और थाईलैंड से आठ नामांकन प्राप्त हुए हैं। उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होने के कारण इनके निर्विरोध चुने जाने की पूरी संभावना है।
नवंबर से शुरू हुईं विषयगत और नीतिगत सत्र
चुनावों के अलावा, कोलंबो महासभा में 24 नवंबर से अनेक शैक्षणिक, विषयगत और नीतिगत सत्र आयोजित हो रहे हैं। इनमें प्रमुख मुद्दे शामिल हैं—सतत विकास, डिजिटल परिवर्तन, सहकारिता नीतियों में सुधार, सहकारी शिक्षा, युवा सहभागिता, जमीनी स्तर पर विकास
भारतीय और वैश्विक विशेषज्ञ सौर ऊर्जा आधारित सहकारी मॉडल, म्यूचुअल इंश्योरेंस, PACS के डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, और सहकारिता-आधारित सामाजिक न्याय जैसे उभरते विषयों पर शोध प्रस्तुत कर रहे हैं।
एशिया–प्रशांत में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और मजबूत होगी
इस बार भारत का प्रतिनिधिमंडल हाल के वर्षों में सबसे बड़ा है और डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव के पुनः अध्यक्ष चुने जाने की संभावना को देखते हुए, कोलंबो महासभा भारत की नेतृत्व क्षमता को और सशक्त बनाने तथा वैश्विक सहकारी आंदोलन में सहयोग को गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रही है।


