राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने 21 नवंबर 2025 को बर्ड, लखनऊ में सहकारी क्षेत्र से जुड़े प्रमुख हितधारकों की राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठक बुलाई है। बैठक का मुख्य उद्देश्य सहकारी बैंकों द्वारा जमीनी स्तर पर कृषि ऋण वितरण में आ रही लगातार गिरावट की समीक्षा करना और इसे सुधारने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना है।
बैठक में देशभर के 50 राज्य सहकारी बैंकों (STCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) के प्रबंध निदेशकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। नाबार्ड का मानना है कि सहकारी बैंकों की सक्रिय भूमिका ग्रामीण वित्त व्यवस्था को मजबूत करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इससे पहले, सहकारिता मंत्रालय (MoC) और नाबार्ड ने सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक भी आयोजित की थी, जिसमें सहकारी बैंकों की घटती हिस्सेदारी पर चिंता व्यक्त की गई थी।
वित्त वर्ष 2024 में सहकारी बैंकों ने 2.3 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरित किया, जो कुल जमीनी स्तर के ऋण (25.1 लाख करोड़ रुपये) का सिर्फ 9.2% था। यह उनके 2.6 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से कम रहा। इसी अवधि में वाणिज्यिक बैंकों का योगदान 79% और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का हिस्सा 12% रहा।
वित्त वर्ष 2025 में सहकारी बैंकों ने वितरण बढ़ाकर 2.4 लाख करोड़ रुपये किया, लेकिन कुल कृषि ऋण 28.7 लाख करोड़ रुपये होने के कारण उनकी हिस्सेदारी घटकर 8.4% रह गई। यह उनके 3.0 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य से काफी कम है। जबकि वाणिज्यिक बैंकों ने 81% की हिस्सेदारी बरकरार रखी और RRBs का योगदान 10.8% दर्ज हुआ।


