संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने भारत के समावेशी, तकनीक-संचालित एवं सामाजिक न्याय आधारित विकास मॉडल को “वैश्विक सबक” करार देते हुए भूरि-भूरि प्रशंसा की है। UNDP के कार्यवाहक प्रशासक हाओलियांग शू ने कहा है कि भारत ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि तीव्र आर्थिक प्रगति और सामाजिक समावेशन को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में शुरू की गई योजनाएं आज दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
हाओलियांग शू ने विशेष रूप से मनरेगा, आयुष्मान भारत, जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी तथा यूपीआई (UPI) आधारित डिजिटल भुगतान व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं केवल नीतिगत दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि ये प्रत्येक गरीब, किसान, मजदूर, महिला एवं युवा की जिंदगी में साकार परिवर्तन ला रही हैं। JAM-UPI की वजह से सरकारी सहायता बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
UNDP ने कोविन प्लेटफॉर्म की भी प्रशंसा की, जिसने कोविड-19 महामारी के दौरान 200 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज का व्यवस्थित वितरण एवं ट्रैकिंग संभव बनाया। इसी क्रम में नवीनतम यू-विन प्लेटफॉर्म गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के टीकाकरण को डिजिटल रूप से मजबूत कर रहा है। UNDP ने इन खुले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को “प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाला, लागत कम करने वाला एवं एकाधिकार रहित” मॉडल बताया है।
आकांक्षी जिला कार्यक्रम को UNDP ने “डेटा आधारित शासन का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण” करार दिया है। इस कार्यक्रम के तहत देश के सबसे पिछड़े जिलों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, बुनियादी ढांचा एवं वित्तीय समावेशन जैसे 100 से अधिक संकेतकों पर निरंतर निगरानी और स्थानीय भागीदारी से अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है। यह मॉडल अब वैश्विक दक्षिण के कई देशों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
हरित एवं जलवायु-अनुकूल विकास के क्षेत्र में भी भारत ने दुनिया को नया रास्ता दिखाया है। नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की छलांग, हरित हाइड्रोजन मिशन तथा हरित रोजगार सृजन की योजनाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें। UNDP ने इसे “जिम्मेदार विकास” का सर्वोत्तम उदाहरण बताया।
UNDP प्रशासक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर एक नेतृत्वकारी भूमिका में है। कई विकासशील देश भारत के इन मॉडल्स को अपनाकर अपने देश में समावेशी विकास की नींव रख रहे हैं। भारत ने यह साबित कर दिया है कि तेज आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय, डिजिटल नवाचार और पारदर्शी शासन का संतुलन बनाकर ही सतत एवं समावेशी प्रगति संभव है।
भारत की यह विकास गाथा आज दुनिया को बता रही है कि एक देश अपने नागरिकों की चिंता करते हुए भी वैश्विक जिम्मेदारियों को निभाते हुए आगे बढ़ सकता है। यही कारण है कि भारत आज न केवल अपने 140 करोड़ नागरिकों के लिए, बल्कि पूरे वैश्विक दक्षिण के लिए एक चमकता हुआ मॉडल बन गया है।


