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अमूल संग्रहालय और केरल की ULCCS को मिला वैश्विक सम्मान: ICA ने दिया ‘ग्लोबल कोऑपरेटिव कल्चरल हेरिटेज साइट’ का दर्जा

1925 में केरल के मलाबार क्षेत्र में सामाजिक सुधारकों ने ULCCS की स्थापना की थी, आज यह विश्व की सबसे प्रतिष्ठित श्रमिक सहकारी संस्थाओं में से एक है

Published: 16:45pm, 17 Nov 2025

केरल की एक सदी पुरानी उरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (ULCCS) को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता संगठन ICA ने एक ऐतिहासिक मान्यता देते हुए ग्लोबल कोऑपरेटिव कल्चरल हेरिटेज साइट घोषित किया है। इस प्रतिष्ठित सूची में ULCCS के साथ गुजरात स्थित डॉ. वर्गीज कुरियन म्यूजियम ऑफ अमूल भी शामिल है, जिससे भारत की सहकारिता विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

यह घोषणा 13 नवंबर 2025 को ब्राजीलिया स्थित प्रतिष्ठित इतामाराती पैलेस में आयोजित एक भव्य समारोह में की गई। इस अवसर पर ICA ने दुनिया की पहली “कोऑपरेटिव कल्चरल हेरिटेज साइट्स मैप” भी जारी किया, जिसमें 25 देशों के 31 संस्थान शामिल हैं। एशिया से केवल सात साइट्स को स्थान दिया गया है।

ULCCS: एक श्रमिक सहकारी से वैश्विक उदाहरण तक का सफर

1925 में केरल के मलाबार क्षेत्र में सामाजिक सुधारकों ने ULCCS की स्थापना की थी। आज यह विश्व की सबसे प्रतिष्ठित श्रमिक सहकारी संस्थाओं में से एक है। यह संस्था:

  • 18,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देती है
  • ₹2,334 करोड़ से अधिक का वार्षिक टर्नओवर दर्ज करती है
  • वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर में लगातार तीन वर्षों तक इंडस्ट्री और यूटिलिटी श्रेणी में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी सहकारी संस्था रही है

इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा ULCCS ने कई क्षेत्रों में विस्तार किया है- UL साइबरपार्क (दुनिया का पहला मजदूरों के स्वामित्व वाला IT पार्क), UL टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस, सर्गालय आर्ट्स & क्राफ्ट्स विलेज, कृषि, शिक्षा, हाउसिंग, मैटरलैब, और कई कौशल विकास व राहत इकाइयाँ। संस्था केरल सरकार के श्रम विभाग के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड कंस्ट्रक्शन भी संचालित करती है।

आईसीए- सहकारिता की जीवंत कक्षाएं

ICA ने नई हेरिटेज साइट को “एकजुटता की जीवंत कक्षाएं” बताया। ICA अध्यक्ष एरियल गुआर्को ने कहा कि सहकारी संस्थाएं केवल आर्थिक ढांचे नहीं हैं, बल्कि “सामूहिक पहचान, इतिहास और सामाजिक परिवर्तन की संरक्षक” हैं। 2025 के मानचित्र में कोऑपरेटिव जगत की कई ऐतिहासिक संस्थाएँ शामिल हैं – रॉचडेल (यूके) में आधुनिक सहकारिता का जन्मस्थान, नोवा पेट्रोपोलिस (ब्राजील) का मोन्यूमेंटो आओ कोऑपरेटिविज्मो, मोशी कोऑपरेटिव यूनिवर्सिटी (तंजानिया), और फेडरेशन ऑफ साउदर्न कोऑपरेटिव्स (यूएसए)।

इस वैश्विक पहल को आगे बढ़ाने में ब्राजील की OCB और भारत की NCDC की अहम भूमिका रही। NCDC के प्रबंध निदेशक पंकज बंसल ने कहा कि भारत की भागीदारी उसकी गहरी सहकारी परंपरा का प्रमाण है।

2026 में आएगी ‘इंटैन्जिबल कोऑपरेटिव हेरिटेज लिस्ट’

ICA ने 2026 में दुनिया की पहली अमूर्त सहकारी धरोहर सूची जारी करने की भी घोषणा की, जिसमें उन परंपराओं, लोककथाओं और सांस्कृतिक प्रथाओं को शामिल किया जाएगा जो सहकारिता की भावना को जीवित रखती हैं।

यह पहल यूनेस्को के MONDIACULT 2025 प्लेटफॉर्म से भी जुड़ी है, जिसने सहकारिता को सांस्कृतिक अधिकारों, विविधता और सम्मानजनक कार्य के प्रमुख समर्थक के रूप में रेखांकित किया है।

ULCCS के लिए यह मान्यता उसके एक छोटे ग्रामीण श्रमिक समूह से वैश्विक सहकारी उत्कृष्टता तक के सफर को मजबूत करती है। यह उपलब्धि दुनिया को बताती है कि भारत की सहकारिता परंपरा साझा स्वामित्व, सामूहिक प्रयास और सतत विकास आज भी वैश्विक मॉडल को प्रेरित कर रही है।

Diksha

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