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देश के विकास का ग्रोथ इंजन बन रहा उत्तर प्रदेश, कृषि विकास में 17.7 फीसदी की रफ्तार के साथ टॉप पर

राज्य सरकार आने वाले वर्षों में कृषि को पर्यावरण-संतुलित और तकनीक-आधारित दृष्टिकोण के साथ विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। ड्रोन सर्वे, जल संरक्षण, कृषि-उद्योग क्लस्टर और मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण जैसे कदम कृषि आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे। 2027 तक किसानों की आय दोगुनी करने और राज्य को कृषि नवाचार का मॉडल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

Published: 15:16pm, 13 Nov 2025

उत्तर प्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। वर्ष 2016-17 में जहां राज्य की कृषि विकास दर मात्र 8.6 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 17.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि राज्य के करोड़ों किसानों की अथक मेहनत तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित नीतिगत हस्तक्षेपों एवं योजनाओं का प्रत्यक्ष परिणाम है।

पिछले आठ वर्षों में सरकार ने अधूरी योजनाओं को तेजी से पूरा किया, किसानों को आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधा और वित्तीय सहायता प्रदान की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कृषि को केवल जीविका नहीं बल्कि “लाभकारी व्यवसाय” के रूप में पुनर्परिभाषित किया गया। प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और मूल्य संवर्धन को नीति के केंद्र में रखकर राज्य ने कृषि को एक नई पहचान दी है।

कृषि विकास दर में उछाल के मुख्य कारण

सरकार की किसान हितैषी योजनाओं जैसे ‘किसान कल्याण मिशन’, ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ और ‘मुख्यमंत्री सामूहिक सिंचाई योजना’ ने सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाया। धान, गन्ना और गेहूं जैसी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई।

राज्य में जैविक और ड्रोन आधारित सटीक कृषि (Precision Farming) को बढ़ावा मिला, जिससे लागत कम हुई और उत्पादन में वृद्धि दर्ज हुई। भूमि सुधार, जल प्रबंधन, जैव उर्वरक प्रयोगशालाएं और कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क के विस्तार ने कृषि अवसंरचना को सशक्त किया।

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1. गेहूं उत्पादन में अव्वल

उत्तर प्रदेश ने 2024-25 में 414.39 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का 35.3% है। राज्य लगातार देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक बना हुआ है।

2. चावल उत्पादन में दूसरा स्थान

प्रदेश ने लगभग 14 लाख मीट्रिक टन चावल उत्पादन किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का 14.7% है। 5.86 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की खेती हो रही है।

3. गन्ना उत्पादन में अग्रणी

29.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैली गन्ना खेती से राज्य देश के कुल गन्ना उत्पादन में 54.5% योगदान देता है। लखीमपुर खीरी, शामली, मुजफ्फरनगर और मेरठ जैसे जिले प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

4. इथेनॉल उत्पादन में राष्ट्रीय नेतृत्व

उत्तर प्रदेश देश के कुल इथेनॉल उत्पादन में 42.27% योगदान दे रहा है। वर्ष 2023-24 में 180 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन हुआ, जबकि 2024-25 में यह क्षमता 223.9 करोड़ लीटर तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ी और पर्यावरण प्रदूषण में कमी आई।

5. तिलहन उत्पादन में प्रगति

राज्य का देश के तिलहन उत्पादन में 6.9% योगदान है। सरसों, तिल, मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलों पर फोकस बढ़ा है। सरकार का लक्ष्य 2026-27 तक तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।

6. दलहन उत्पादन में सुधार

राज्य का दलहन उत्पादन 3.25 मिलियन टन से अधिक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय उत्पादन का 14.1% है। मसूर, उड़द, अरहर और चना की खेती को मिशन मोड में प्रोत्साहित किया जा रहा है।

7. दूध उत्पादन में सबसे आगे

बेसिक एनिमल हसबेंडरी स्टैटिस्टिक्स 2023-24 के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने 239.30 लाख टन दूध का उत्पादन किया है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 471 ग्राम प्रतिदिन तक पहुंची है, जिससे यूपी देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बना हुआ है।

भविष्य की दिशा: प्राकृतिक खेती और डिजिटल नवाचार

राज्य सरकार अब कृषि को जलवायु-अनुकूल, पर्यावरण-संतुलित और डिजिटल तकनीक आधारित बनाने की दिशा में अग्रसर है। ड्रोन सर्वे, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड, जल संरक्षण योजनाएं और कृषि-उद्योग क्लस्टर इस दिशा के प्रमुख घटक हैं।

सरकार का उद्देश्य वर्ष 2027 तक किसानों की आय दोगुनी करने और उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर कृषि राज्य के रूप में स्थापित करना है।

यह प्रगति न केवल आर्थिक संकेतकों में वृद्धि दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा राष्ट्रीय कृषि नीतियों में उत्तर प्रदेश की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करती है। राज्य सरकार की नीतियां अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत कर रही हैं।

YuvaSahakar Desk

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