केंद्र सरकार ने देश में चीनी उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि एवं घरेलू बाजार में कीमतों पर पड़ रहे दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। मंत्रालय ने 2025-26 चीनी सत्र (अक्टूबर 2025-सितंबर 2026) के लिए 15 लाख मीट्रिक टन चीनी के निर्यात की अनुमति प्रदान की है तथा शीरे (मोलासेस) पर पूर्व में लगाया गया 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क पूर्णतः समाप्त कर दिया है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी द्वारा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को प्रेषित आधिकारिक पत्र में दी गई है।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब देश में चीनी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है और इससे घरेलू बाजार में एक्स-मिल कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। जोशी ने कहा कि यह कदम बाजार में संतुलन स्थापित करने, किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और मिलों की तरलता सुधारने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पत्र में स्पष्ट किया कि यह नीतिगत हस्तक्षेप घरेलू बाजार में चीनी की एक्स-मिल कीमतों को स्थिर रखने तथा चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक था। जनवरी 2025 में 10 लाख टन निर्यात अनुमति के पश्चात् एक्स-मिल कीमतें ₹3,370 प्रति क्विंटल से बढ़कर ₹3,700-₹3,930 प्रति क्विंटल तक पहुंची थीं, जो इस नीति की प्रभावशीलता को प्रमाणित करता है। वर्तमान निर्णय से उद्योग को अधिशेष प्रबंधन, मूल्य स्थिरता एवं किसानों को समयबद्ध भुगतान में सहायता मिलेगी।
उद्योग संगठनों ने किया स्वागत
भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे बाजार में संतुलन बनेगा और घरेलू कीमतों में स्थिरता आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम चीनी मिलों को अधिशेष उत्पादन प्रबंधन और किसानों को समय पर भुगतान में मदद करेगा।
18.5 प्रतिशत उत्पादन वृद्धि का अनुमान
ISMA के अनुसार, 2025-26 सीजन में देश का शुद्ध चीनी उत्पादन 30.95 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जिसमें से लगभग 3.4 मिलियन टन चीनी इथेनॉल उत्पादन में प्रयुक्त होगी। महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बेहतर गन्ना उत्पादन के चलते कुल उत्पादन में 18.5 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है। महाराष्ट्र में अनुमानित उत्पादन 1.3 करोड़ टन, उत्तर प्रदेश में 1.032 करोड़ टन और कर्नाटक में 63.5 लाख टन रहेगा।
कर्नाटक में चीनी संकट और समाधान
कर्नाटक में हाल ही में गन्ना मूल्य को लेकर किसानों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार और चीनी मिलों ने किसानों को ₹50 प्रति टन अतिरिक्त भुगतान का निर्णय लिया है। अब किसानों को ₹3,300 प्रति टन दर से भुगतान किया जाएगा। जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है।
इथेनॉल उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि
केंद्र सरकार ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की हैं। 2013 में जहां इथेनॉल की आपूर्ति 38 करोड़ लीटर थी, वहीं अब यह 1001 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है। कर्नाटक में इथेनॉल डिस्टिलरी स्थापित करने के लिए ₹435.42 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई है। राज्य में इथेनॉल आवंटन 2022-23 के 85 करोड़ लीटर से बढ़ाकर 2025-26 में 133 करोड़ लीटर कर दिया गया है। इन कदमों से न केवल मिलों को वैकल्पिक आय का स्रोत मिला है बल्कि किसानों को समय पर भुगतान भी सुनिश्चित हुआ है।
किसानों का भुगतान लगभग पूरा
केंद्र सरकार की नीतियों के चलते अब गन्ना किसानों का भुगतान समय पर किया जा रहा है। कर्नाटक में 2022-23 और 2023-24 सत्रों का पूरा भुगतान किया जा चुका है, जबकि 2024-25 सीजन के लिए केवल ₹50 लाख का बकाया 30 सितंबर 2025 तक शेष है। इससे पहले 2014 से पहले किसानों को भुगतान के लिए आंदोलन करना पड़ता था, लेकिन अब यह स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
निर्यात नीति और बाजार पर प्रभाव
इस वर्ष जनवरी में सरकार ने 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, जिससे एक्स-मिल कीमतें ₹3,370 प्रति क्विंटल से बढ़कर ₹3,930 प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं। इस बार 15 लाख टन के निर्यात की अनुमति से बाजार में संतुलन और स्थिरता बनी रहेगी।
इथेनॉल मूल्य वृद्धि की मांग
ISMA ने सरकार से आग्रह किया है कि बढ़ती फीडस्टॉक और रूपांतरण लागत को ध्यान में रखते हुए इथेनॉल की खरीद कीमत में संशोधन किया जाए। संगठन का कहना है कि फिलहाल 289 करोड़ लीटर इथेनॉल आवंटित किया गया है, जो कुल क्षमता का केवल 27.5 प्रतिशत है। नीति आयोग के रोडमैप के अनुसार चीनी उद्योग का योगदान 55 प्रतिशत तक होना चाहिए।
उत्पादन, खपत और स्टॉक का संतुलन
ISMA के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार 2025-26 में भारत का शुद्ध चीनी उत्पादन 309.5 लाख टन रहेगा। इसमें से 34 लाख टन इथेनॉल उत्पादन में प्रयुक्त होगा। घरेलू खपत 285 लाख टन के आसपास रहने का अनुमान है और सीजन के अंत में 74.5 लाख टन का स्टॉक शेष रहेगा, जिससे निर्यात और घरेलू आपूर्ति दोनों प्रभावित नहीं होंगे।
एमएसपी में वृद्धि की मांग
ISMA ने कहा कि चीनी निर्यात की अनुमति स्वागत योग्य है, लेकिन उद्योग लागत दबाव झेल रहा है। गन्ने की बढ़ती कीमतों से चीनी उत्पादन लागत ₹41.7 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। संघ ने सरकार से न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में वृद्धि करने का अनुरोध किया है, जो पिछले छह वर्षों से स्थिर है।
सरकार के कदम से उद्योग को नई दिशा
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि “निर्यात अनुमति का यह निर्णय घरेलू और वैश्विक बाजार की वास्तविकताओं को संतुलित करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है।” उन्होंने सरकार से एमएसपी और इथेनॉल खरीद मूल्य दोनों में संशोधन का अनुरोध किया ताकि किसानों को समय पर भुगतान और उद्योग की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।


