सहकारिता क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। अभी जो युवा इससे जुड़े हैं उनमें से ज्यादातर की पारिवारिक पृष्ठभूमि सहकारी क्षेत्र की रही है। ऐसे ही ऊर्जावान युवाओं में शुमार हैं हर्ष संघाणी जो इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (आईसीए) की यूथ कमेटी के प्रेसीडेंट चुने गए हैं। इस पद पर चुने जाने वाले वह पहले भारतीय हैं। आईसीए दुनिया के 130 देशों के सहकारी संगठनों का शीर्ष संगठन है। भारतीय सहकारी क्षेत्र में युवाओं को कैसे आगे बढ़ाया जाए, युवाओं के लिए सहकारी क्षेत्र में कितने मौके और कितनी चुनौतियां हैं सहित तमाम मुद्दों पर हर्ष संघाणी से अभिषेक राजा और नुरूल कुसैन ने विस्तार से बातचीत की। पेश हैं उनके प्रमुख अंश।
सवाल- आईसीए यूथ कमेटी का प्रेसीडेंट बनने पर युवा सहकार की पूरी टीम की ओर से आपको बधाई।
जवाब– धन्यवाद।
सवाल– युवाओं के लिए सहकारी क्षेत्र में कितनी संभावनाएं हैं?
जवाब- सहकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अपार संभावनाएं हैं। नौकरी की तलाश में युवा भटकते रहते हैं। उन्हें नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनने की जरूरत है। इसी सोच को लेकर भारतीय सहकारिता आगे बढ़ रही है। खासकर, जब से सहकारिता का अलग मंत्रालय बना है, तब से सरकार इसी विजन पर फोकस कर रही है। भारत में जब भी सहकारिता की बात होती है, तो तीन क्षेत्रों के बारे में ही ज्यादा बात होती है। बैंकिंग, डेयरी एवं पशुपालन और कृषि क्षेत्र के बारे में ही हम ज्यादा बात करते हैं। मगर भारत में अभी तक टेक कोऑपरेटिव के बारे में चर्चा नहीं हुई है। इसी तरह, हेल्थ कोऑपरेटिव जो हॉस्पिटलाइजेशन से जुड़ी है, एजुकेशन जैसे कई ऐसे कोऑपरेटिव फ्रेमवर्क हैं जिस पर हम लोग काम कर सकते हैं। मुझे लगता है कि युवाओं को सहकारिता आंदोलन से जोड़ना है, तो भारत में नए फ्रेमवर्क को लाना पड़ेगा।
सवाल- त्रिभुवन कोऑपरेटिव यूनिवर्सिटी की स्थापना को आप कैसे देखते हैं?
जवाब- मैं इसे भारतीय सहकारिता क्षेत्र में शिक्षण और प्रशिक्षण में एक बड़ा बदलाव आता हुआ देख रहा हूं। यूनिवर्सिटी की स्थापना से सहकारी क्षेत्र में उच्च शिक्षा को तो बढ़ावा मिलेगा ही, इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि स्कूल स्तर से ही कोऑपरेटिव की पढ़ाई का जो फैसला हुआ है उससे अगले 10-20 साल में बहुत बड़ा परिवर्तन आने वाला है। कोई भी बच्चा जब स्कूल से ही कोऑपरेटिव के बारे में पढ़ाई करके निकलेगा, तो उसे इस क्षेत्र की पहले से ही जानकारी होगी। अभी होता यह है कि युवाओं को इस क्षेत्र के बारे में कम जानकारी होती है। उन्हें यह पता ही नहीं होता है कि इसमें कैसे आना चाहिए, इसके माध्यम से वह क्या-क्या कर सकता है और कैसे इसे अपना करियर बना सकता है। एजुकेशन क्षेत्र में भी कोऑपरेटिव्स पर फोकस शुरू हो गया है। सेकेंडरी एजुकेशन से लेकर यूनिवर्सिटी तक कोऑपरेटिव्स बनाए जा रहे हैं।
सवाल- क्या आपको लगता है कि युवाओं ने कोऑपरेटिव को करियर के रूप में देखना शुरू कर दिया है?
जवाब- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो आईसीए के जो 130 सदस्य देश हैं उनमें से बहुत सारे युवा सदस्य आईसीए यूथ कमेटी से जुड़े हुए हैं। कई देशों के युवा अलग–अलग तरीकों से कोऑपरेटिव से जुड़ रहे हैं। कोई कंज्यूमर कोऑपरेशन से जुड़ा है, कोई एनिमल हसबैंड्री सेक्टर से जुड़ा हुआ है, तो कोई फाइनेंसिंग कोऑपरेटिव से जुड़ा हुआ है। भारत में कोऑपरेटिव से युवाओं को जोड़ने के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह जो कदम उठा रहे हैं उससे चीजें बदल रही हैं। युवा सहकारिता की तरफ मुड़ रहे हैं। सरकार की पहल का व्यापक असर अगले 5-10 साल में देखने को मिलेगा। भारत की बदौलत एशिया के सहकारिता क्षेत्र में भी बहुत बड़े बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।
सवाल- आईसीए यूथ कमेटी का प्रेसीडेंट होने के नाते आप इसमें क्या बदलाव लाना चाहते हैं या लाने को लेकर आपकी क्या तैयारी है?
जवाब- आईसीए यूथ कमेटी के सदस्य दुनिया के विभिन्न देशों से होते हैं। किसी कार्यक्रम या सेशन में सभी का एक समय एक साथ मिलना मुश्किल होता है। इस समस्या से निपटने के लिए हमने ग्लोबल यूथ कोऑपरेटिव लीडरशिप समिट करने का फैसला किया है। यह समिट अगले साल मार्च के अंत तक अप्रैल में हो सकता है। इसके लिए दो-तीन देशों के प्रधानमंत्रियों और युवा मामले के मंत्रियों से बातचीत चल रही है। इसके माध्यम से हम इंटर–जेनरेशनल डायलॉग शुरू करने वाले हैं। कोऑपरेटिव के सीनियर लीडर्स से युवा लीडर्स को जोड़कर उनके अनुभव से सीखने की यह शुरुआत है। इसके माध्यम से ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी से लेकर ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए कोऑपरेटिव के माध्यम से कैसे सपोर्ट कर सकते हैं, ये चीजें शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही नए–नए क्षेत्र जैसे टेक्नोलॉजी कोऑपरेटिव्स हैं, एआई में कैसे आगे बढ़ सकते हैं, इसके लिए कोऑपरेटिव्स का एक थिंक टैंक बना रहे हैं जिसमें युवा आकर अपनी सोच को आगे बढ़ा सकते हैं। यह हमारा महत्वपूर्ण प्रयास रहेगा।
सवाल- अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 से भारतीय सहकारिता को कितना फायदा हुआ है?
जवाब- भारत एक ऐसा देश है जहां पहले से सहकारिता का बहुत बड़ा आंदोलन चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के दौरान सहकारिता को लेकर देश के लोगों में जागरूकता बढ़ी है। कोऑपरेटिव्स से अर्थव्यवस्था को कैसे फायदा होता है, इससे हमारे गांवों में कैसे आर्थिक रूप से फायदा होता है, ये सारी चीजें लोग समझने लगे हैं। मेरे गुरु मुकुंद राव जी देवकर ने मुझे एक सुझाव दिया था कि क्यों न हम कोऑपरेटिव्स को ऐसा माध्यम बनाएं जो न बहुत पूंजीवादी हो और न समाजवादी हो, बल्कि ये दोनों के बीच में हो। इस बारे में हम लोग सोच रहे हैं और इसे बाकी लोगों को भी समझाना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष से लोगों को समझाना और जागरूक करना बहुत आसान हो गया है। इसकी वजह से घर-घर में सहकारिता को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है।
सवाल- आप केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह से भी मिले हैं। उन्होंने आपको कोई सुझाव दिया कि युवाओं को आगे कैसे बढ़ाना है?
जवाब- उन्होंने बहुत समर्थन दिया है। उन्होंने सुझाव तो बहुत सारे दिए हैं। मैंने भी उनसे बहुत सारी मांग की है। मुझे पता है कि उन मांगों पर वह अवश्य ध्यान देंगे और उन्हें पूरी करेंगे। उनके समर्थन से प्रेरणा मिलती है। युवाओं को प्रेरणा और समर्थन ही चाहिए। अमित शाह जी ने जो प्रेरणा दी है और जो समर्थन दिया है उससे ऐसा लगता है कि आगे का भविष्य युवा और सहकारिता दोनों के लिए बहुत मजबूत है।


