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भारत में पहली बार डिजिटल ‘समुद्री मत्स्य जनगणना 2025’ की शुरुआत

केंद्र सरकार ने “समुद्री मत्स्य जनगणना 2025” की शुरुआत की है, जो पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होगी। मोबाइल ऐप्स और ड्रोन तकनीक के जरिए देश के 13 तटीय राज्यों में 12 लाख मछुआरा परिवारों का सटीक डेटा जुटाया जाएगा। इससे सरकार को मछुआरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति समझने और योजनाओं के लाभ सीधा पहुंचाने में मदद मिलेगी।

Published: 08:00am, 05 Nov 2025

भारत सरकार ने समुद्री अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मछुआरा समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान हेतु एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए समुद्री मत्स्य जनगणना 2025 (Marine Fisheries Census 2025) का औपचारिक शुभारंभ किया है। यह देश की पहली पूर्णतः डिजिटल एवं भू-संदर्भित (Geo-referenced) जनगणना है, जो पारंपरिक कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर आधुनिक तकनीक के माध्यम से मछुआरों के जीवन की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करेगी।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कोच्चि स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) में इस अभियान के घरेलू गणना चरण (Household Enumeration Phase) का शुभारंभ किया, जिसमें CMFRI नोडल एजेंसी तथा मत्स्य सर्वेक्षण भारत (FSI) संचालन साझेदार के रूप में कार्यरत है। यह जनगणना 3 नवंबर से 18 दिसंबर 2025 तक 45 दिनों की अवधि में संपन्न होगी, जिसमें हजारों प्रशिक्षित क्षेत्रीय कर्मचारी भाग लेंगे।

9 तटीय राज्यों (गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल) तथा 4 केंद्र शासित प्रदेशों (अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, दादरा एवं नगर हवेली एवं दमन एवं दीव, लक्षद्वीप एवं पुदुच्चेरी) के लगभग 4,000-5,000 समुद्री मछली पकड़ने वाले गांवों में निवासरत 12 लाख से अधिक मछुआरा परिवारों का सर्वेक्षण किया जाएगा। यह अभियान मछुआरों की जनसंख्या गणना से आगे बढ़कर उनके समग्र विकास पर केंद्रित है, जो पूर्व की जनगणनाओं (2005, 2010 एवं 2016) से कहीं अधिक विस्तृत एवं सटीक होगा।

जनगणना में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) द्वारा विकसित दो विशेष एंड्रॉइड एप्लिकेशन – व्यास-भारत (VYAS-BHARAT) एवं व्यास-सूत्र (VYAS-SUTRA) – का उपयोग किया जाएगा।

मोबाइल ऐप से घर-घर गिनती

इस जनगणना के लिए दो विशेष एंड्रॉइड एप्लिकेशन विकसित किए गए हैं –

  • VYAS-BHARAT App: इस ऐप के माध्यम से गणनाकर्मी घर-घर जाकर मछुआरों के परिवारों की जानकारी दर्ज करेंगे।

  • VYAS-SUTRA App: यह ऐप निगरानी और सुपरविजन के लिए उपयोग होगा, ताकि हर डेटा रीयल-टाइम में और पूरी सटीकता से अपलोड हो सके।

 ये एप बहुभाषी इंटरफेस के साथ-साथ जीपीएस-टैग्ड एंट्रीज का समर्थन करेंगे, जिससे भू-संदर्भित डेटा मैपिंग संभव होगी। इसके अतिरिक्त, सामान्य सेवा केंद्रों (Common Service Centres) के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया सरल बनाई गई है, ताकि ग्रामीण मछुआरों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। यह तकनीकी नवाचार न केवल त्रुटियों को न्यूनतम करेगा, बल्कि डेटा संग्रह की गति को भी तिगुना कर देगा।

जनगणना के दौरान मछुआरा परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का गहन मूल्यांकन किया जाएगा, जिसमें परिवार की कुल आय एवं संपत्ति की स्थिति, मछली पालन के साधनों एवं नावों की संख्या, पारिवारिक कर्ज एवं बीमा की व्यवस्था, कोविड-19 महामारी का प्रभाव तथा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) एवं प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) जैसे सरकारी कार्यक्रमों से प्राप्त लाभ शामिल हैं।

डिजिटल डेटाबेस बनेगा मछुआरों के जीवन का सटीक रिकॉर्ड

सरकार का उद्देश्य केवल मछुआरों की गिनती करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड बनाना है।
जनगणना में शामिल होंगी ये प्रमुख जानकारियां –

  • परिवार की आय और संपत्ति की स्थिति

  • मछली पालन के साधन और नावों की संख्या

  • परिवार पर ऋण और बीमा की जानकारी

  • कोविड-19 जैसी आपदाओं का प्रभाव

  • सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) से लाभ की स्थिति

इन आंकड़ों के आधार पर सरकार यह तय कर सकेगी कि कौन-से तटीय क्षेत्र में मछुआरे सबसे अधिक कठिनाई में हैं और किसे तुरंत सहायता की आवश्यकता है। सरकार का उद्देश्य एक संपूर्ण डिजिटल राष्ट्रीय मत्स्य पालन डेटाबेस तैयार करना है, जो नीति निर्माण एवं संसाधन वितरण में सहायक सिद्ध होगा। सभी मछुआरों एवं मत्स्य श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय मत्स्य विकास पोर्टल (NFDP) पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, ताकि वित्तीय सहायता एवं योजनाओं का लाभ केवल पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे।

पारदर्शिता एवं सत्यापन हेतु ड्रोन तकनीक का अभिनव उपयोग किया जा रहा है। विजाग, काकीनाडा, तूतीकोरिन, मंगलुरु, बेयपोर एवं पुथियप्पा जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर ड्रोन के माध्यम से मछली पकड़ने वाली नावों की हवाई गणना की गई है, जो जमीनी सर्वेक्षण के आंकड़ों को प्रमाणित करेगी।

केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने शुभारंभ अवसर पर कहा कि मछुआरों की सुरक्षा एवं आजीविका सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में, नावों में ट्रांसपोंडर डिवाइस एवं टर्टल एक्सक्लूडर जैसे वैज्ञानिक उपकरणों का निःशुल्क स्थापन किया जा रहा है। उन्होंने सभी मछुआरों से अपील की कि वे NFDP पर तत्काल पंजीकरण कराएं, जिससे PM-MKSSY के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके। यह जनगणना ‘स्मार्ट सेंसस, स्मार्टर फिशरीज’ की अवधारणा को साकार करेगी, जो समुद्री मत्स्य पालन को सतत एवं उत्पादक बनाएगी।

ड्रोन से नावों की हवाई गिनती

इस जनगणना में ड्रोन तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। विशाखापत्तनम, काकीनाडा, तूतीकोरिन, मंगलुरु, बेयपोर और पुथियप्पा जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर ड्रोन के माध्यम से मछली पकड़ने वाली नावों की गिनती की जा रही है। यह जानकारी जमीनी सर्वे से प्राप्त आंकड़ों के सत्यापन में मदद करेगी और गणना को पारदर्शी बनाएगी।

NFDP पर पंजीकरण अनिवार्य

केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मछुआरों से अपील की कि वे राष्ट्रीय मत्स्य विकास पोर्टल (National Fisheries Digital Platform – NFDP) पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराएं। उन्होंने कहा कि केवल वही मछुआरे प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना (PM-MKSSY) के तहत वित्तीय सहायता के पात्र होंगे जो पोर्टल पर पंजीकृत हैं।

पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) के माध्यम से ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई है।

मत्स्य पालन मंत्रालय का कहना है कि Marine Fisheries Census 2025 से प्राप्त आंकड़े न केवल योजनाओं के बेहतर लक्ष्य निर्धारण में मदद करेंगे, बल्कि तटीय राज्यों के लिए दीर्घकालिक नीति निर्माण की दिशा भी तय करेंगे।

YuvaSahakar Desk

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