भारतीय कृषि (Agriculture) क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) 58 वर्ष का हो गया है। 3 नवंबर 1967 को स्थापित इस सहकारी (Cooperative( संगठन ने पिछले छह दशकों में किसानों (Farmers) की आत्मनिर्भरता, सहयोगिता और तकनीकी नवाचार के माध्यम से देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकारी नीतियों के अनुरूप, IFFCO ने हमेशा राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को प्राथमिकता दी है, जिसमें आत्मनिर्भर भारत, हरित क्रांति और सतत विकास शामिल हैं।
इस अवसर पर संगठन के चेयरमैन दिलीप संघाणी और मैनेजिंग डायरेक्टर केजे पटेल ने किसानों, सहकारी सदस्यों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए IFFCO की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। यह दिवस न केवल IFFCO की सफलता का उत्सव है, बल्कि यह भारत सरकार की सहकारी आंदोलन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं का भी प्रतिबिंब है, जो ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।
IFFCO के चेयरमैन दिलीप संघाणी ने अपने संबोधन में कहा कि संगठन की लगभग छह दशकों की यात्रा सहयोग, नवाचार और किसानों के अटूट विश्वास की ताकत को दर्शाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि IFFCO का जन्म किसानों को एकजुटता और आत्मनिर्भरता के माध्यम से सशक्त बनाने के महान सपने से हुआ था, जो आज देश के हर गांव में साकार हो चुका है। सरकारी दृष्टिकोण से देखें तो IFFCO ने हमेशा तकनीक और परंपरा का सामंजस्यपूर्ण मेल किया है, ताकि आधुनिक विज्ञान किसानों की आवश्यकताओं और मिट्टी की उर्वरता को पूरा कर सके।
संघाणी ने आगे बताया कि IFFCO का मुख्य लक्ष्य केवल उर्वरक उत्पादन नहीं है, बल्कि किसानों की समृद्धि को बढ़ावा देना है। डिजिटल समाधानों से लेकर नैनो फर्टिलाइजर तक, संगठन निरंतर कृषि विकास की नई परिभाषाएं गढ़ रहा है। भविष्य में IFFCO का संकल्प है कि भारतीय कृषि को और अधिक टिकाऊ, उत्पादक तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जाए। यह दृष्टिकोण भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी पहलों से पूर्णतः मेल खाता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं।
इस अवसर पर दिलीप संघाणी और केजे पटेल ने सभी किसानों, सहकारी सदस्यों तथा कर्मचारियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने भारत के सहकारी आंदोलन और कृषि विकास में IFFCO परिवार के योगदान तथा समर्पण के लिए गहन आभार व्यक्त किया।
केजे पटेल ने अपने संदेश में कहा कि IFFCO हमेशा से भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की सेवा के लिए पूर्णतः समर्पित रहा है। उन्होंने बताया कि नई पीढ़ी की नैनो-टेक्नोलॉजी उत्पादों के माध्यम से IFFCO खेती में एक नई क्रांति ला रहा है। सरकारी पर्यावरण नीतियों के अनुरूप, IFFCO के नैनो फर्टिलाइजर जैसे नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और नैनो कॉपर किसानों को बेहतर पोषण, अधिक उत्पादन तथा उच्च गुणवत्ता प्रदान करते हैं। साथ ही, ये उत्पाद खर्च को कम करने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को भी न्यूनतम रखते हैं। पटेल ने जोर दिया कि IFFCO का विशाल सहकारी नेटवर्क न केवल किसानों को सशक्त बनाता है, बल्कि ग्रामीण उत्पादकों को विकास, नवाचार और आत्मनिर्भरता अपनाने के लिए प्रेरित करता है। यह नेटवर्क भारत सरकार की सहकारी विकास योजनाओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो लाखों किसानों को लाभान्वित कर रहा है।
केजे पटेल ने IFFCO की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 3 नवंबर 1967 को स्थापित इस संगठन ने मात्र 57 सदस्य सोसाइटीज से अपनी शुरुआत की थी। आज यह 36,000 से अधिक सोसाइटीज का प्रतिनिधित्व करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा सहकारी संगठन बन गया है, जो पांच करोड़ से ज्यादा किसानों की सेवा कर रहा है। IFFCO के कलोल, कांडला, ओंला, फूलपुर और पारादीप स्थित प्लांट अपनी दक्षता, विश्वसनीयता तथा पर्यावरण-हितैषी संचालन के लिए विख्यात हैं। ये प्लांट सरकारी पर्यावरण मानकों का पूर्ण अनुपालन करते हुए संचालित होते हैं।
IFFCO ने उर्वरक उत्पादन से आगे बढ़कर डिजिटल कॉमर्स, ग्रामीण वित्त, नवीकरणीय ऊर्जा तथा किसान कल्याण के क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। संगठन की पहल जैसे IFFCO बाजार और डिजिटल सलाह प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों तक कृषि उत्पाद, जानकारी तथा तकनीकी नवाचार आसानी से पहुंचाए जा रहे हैं। ये प्रयास भारत सरकार की ‘डिजिटल कृषि’ और ‘नवीकरणीय ऊर्जा’ नीतियों से जुड़े हुए हैं, जो सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहकारी उत्कृष्टता, स्थिरता तथा तकनीकी नवाचार के लिए अनेक पुरस्कार जीतने वाला IFFCO आज भी “जय किसान, जय सहकार” की भावना को जीवंत रखे हुए है। अपने 58वें स्थापना दिवस पर, IFFCO ने एक बार फिर संकल्प लिया है कि वह हर किसान को सशक्त बनाएगा और भारतीय कृषि को स्मार्ट, हरित तथा आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जाएगा।


