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जिस शिद्दत से मेहनत की, हमारी टीम वन डे क्रिकेट विश्व कप जीतने की हकदार थी: हरमनप्रीत कौर

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार आईसीसी वनडे विश्व कप जीता। भावुक हरमनप्रीत ने इसे सपने का सच होना बताया। दीप्ति शर्मा और शैफाली वर्मा ने फाइनल में दमदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया।

Published: 22:01pm, 03 Nov 2025

हरमनप्रीत कौर अपनी कप्तानी में भारत को नवी मुंबई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आईसीसी महिला वनडे क्रिकेट विश्व कप फाइनल जिता, पहली बार खिताब जिताने के बाद बेहद भावुक हो गईं। हरमनप्रीत कौर के लिए भारत को वनडे क्रिकेट विश्व कप जिताना वाकई एक सपने का सच होना है। चोट के चलते सेमीफाइनल और फाइनल से बाहर हुई प्रतीका रावल व्हीलचेयर पर अपनी भारतीय टीम की खिताब जीत का जश्न मनाने मैदान पर आईं।

भारत को वनडे विश्व कप खिताब जिताने के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा, ‘मेरे पास अपनी भारतीय महिला क्रिकेट टीम को वनडे विश्व कप की खिताबी जीत को बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। लगातार तीन मैच हारने के बाद भी हमने खुद पर भरोसा कायम रखा। हमें मालूम था कि हमारे पास कहानी पलटने के लिए कुछ खास है। हमने सकारात्मक सोच बरकरार रखी। हमें मालूम था कि हमें क्या करना है। हमने जिस शिद्दत से मेहनत की, उससे हमारी टीम महिला वनडे क्रिकेट खिताब जीतने की हकदार थी। हम बहुत उतार-चढ़ावों से गुजरे, लेकिन हमने खुद पर भरोसा कायम रखा। हमने ज्यादा समय तक बढ़िया क्रिकेट खेली। इधर-उधर देखने की बजाय हमारा ध्यान पूरी तरह अपने मुख्य लक्ष्य पर रहा। हमारी टीम अपने पिछले मैच में जिस अंदाज़ में खेली, उससे हमें खिताब जीतने का भरोसा था।’

कप्तान हरमन ने कहा, ’बहुत चीजें बदलीं, पर बावजूद इसके हमारा आत्मविश्वास कायम रहा। हम यह जानते थे कि बतौर टीम हम क्या कुछ कर सकते हैं। हमें फाइनल में मालूम था कि बल्लेबाजी के लिए स्थितियां मुश्किल होंगी, पर स्मृति मंधाना और शैफाली वर्मा की सलामी जोड़ी को इसका श्रेय देना होगा कि दोनों ने ही शुरू के दस ओवरों में बहुत समझदारी से बल्लेबाजी की। जहां तक मेरे नौ मैचों में से आठ में टॉस हारने की बात है, तो फाइनल में पहली ही गेंद से मेरा यह विश्वास था कि यह कोई मायने नहीं रखता, क्योंकि हम अमूमन टॉस नहीं जीतते हैं, तो हम यह जानते थे कि हमें पहले ही बल्लेबाजी करनी होगी। सेंचुरी जड़ने के बाद दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लॉरा वुल्फर्ट 42वें ओवर में आउट होते ही फाइनल में पलड़ा हमारी ओर झुक गया।’

भारत की कप्तान हरमनप्रीत ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य एकदम सीधा था। हम जानते थे कि यदि हम बड़े लक्ष्य की बाबत सोचते हैं, तो हम दबाव में आ सकते हैं। मुख्य बात यह थी कि बल्लेबाजी करते हुए हमने अपना खेल खेलना था। हमने 300 रन बनाने की कोशिश की, लेकिन हम इससे एक रन ही दूर रह गए। इसके बाद हम मैदान पर एक इकाई के रूप में फील्डिंग करने उतरे। जब भी हमें विकेट की जरूरत थी, हम इसे हासिल करने में सफल रहे। कुल मिलाकर फाइनल हमारे लिए बहुत बढ़िया रहा। बेशक यह कहने में आसान लगता है, लेकिन जब दक्षिण अफ्रीकी टीम बल्लेबाजी कर रही थी और खासतौर पर उनकी कप्तान लॉरा वुल्फर्ट कोई मौका नहीं दे रही थीं, तब स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। मैं वनडे विश्व कप खिताब जीतने के अपने भावों को बयां नहीं कर सकती।’

जब हरमनप्रीत कौर से वनडे विश्व कप की खिताबी जीत के पलों को पूर्व खिलाड़ियों के साथ साझा करने के मायनों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘जब मैं टीम में नई थी, तो क्रिकेट के बारे में बहुत नहीं जानती थी। ऐसे में झूलन दी हमेशा मेरे साथ खड़ी रहीं। साथ ही अंजुम (चोपड़ा) दी ने भी हमेशा मेरा साथ दिया। झूलन और अंजुम दी, दोनों का मुझे बहुत समर्थन मिला। मैं खुशकिस्मत हूं कि इन दोनों के साथ इस खास क्षण को साझा कर रही हूं। चोट के चलते पहले यस्तिका भाटिया और फिर प्रतीका रावल के बाहर होने पर ड्रेसिंग रूम में हर कोई रो रहा था। हममें हर कोई सकारात्मक होकर हमारे वनडे विश्व कप खिताब जीतने की बाबत ही सोच रहा था। बीता एक महीना खासा रोचक रहा। ऐसा बहुत कम होता है जब चीजें आपकी योजना के मुताबिक न हों और फिर भी आप बेहद सकारात्मक बने रहें।’

कप्तान हरमन ने कहा, ’इंग्लैंड के हाथों हार से हमारे लिए बहुत कुछ बदल गया। हम बार-बार एक ही चीज़ को नहीं दोहरा सकते थे। हमें मानसिक मजबूती दिखाने की जरूरत थी। इंग्लैंड के हाथों हार ने सब कुछ बदल दिया। इस हार का असर हर किसी पर हुआ। हम वनडे विश्व कप के लिए और ज्यादा तैयार थे। हमने स्थिति को ध्यान में रखकर आकलन करने के लिए योग और ध्यान लगाना शुरू किया। इसने बताया कि हम यहां कुछ कर गुजरने आए हैं और अब इसे अमली जामा पहनाने का वक्त था।

हरमन ने कहा कि फाइनल में जब दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लॉरा वुल्फर्ट और लूज सुन बल्लेबाजी कर रही थीं, तो वे काफी बढ़िया दिख रही थीं। मैंने तभी शैफाली को देखा और जिस विश्वास से उन्होंने बल्लेबाजी की थी, मैं जानती थी कि रविवार का दिन हमारा है। मैंने तब यही सोचा कि मुझे अपने मन की सुननी चाहिए। मेरे दिल ने कहा कि मुझे शैफाली से कम से कम एक ओवर तो फिंकवाना चाहिए, और यह फाइनल का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। प्रतीका के चोट के चलते बाहर होने के बाद सेमीफाइनल और फाइनल के लिए आखिरी वक्त पर हमारी टीम में जगह पाने वाली शैफाली के टीम में आने पर हमने उनसे कहा कि आपको दो-तीन ओवर गेंदबाजी करनी पड़ सकती है। तब शैफाली ने कहा था कि यदि आप मुझसे गेंदबाजी कराती हैं, तो मैं दस ओवर फेंक सकती हूं। शैफाली की सकारात्मक सोच के लिए उनकी तारीफ करनी होगी कि वह हमेशा टीम के लिए कुछ भी करने को तैयार थीं। शैफाली ने भारत के लिए जिस तरह प्रदर्शन किया, इसके लिए उन्हें सलाम है।

भारत की वर्ल्ड कप विजेता टीम की कप्तान ने कहा कि मुझे मालूम था कि हमारा 298 का स्कोर फाइनल के लिए पर्याप्त है, क्योंकि इसका दबाव कुछ ज्यादा ही होता है। हमें दक्षिण अफ्रीका की शानदार बल्लेबाजी के लिए उन्हें श्रेय देना होगा। दक्षिण अफ्रीका की टीम पारी के अंत में कुछ बौखला गई और हमने इसका लाभ उठाया। दीप्ति ने ऐसे में सही समय पर आकर विकेट चटकाए। हर बार हर विश्व कप के बाद हम अंतिम बाधा को पार कर खिताब जीतने की चर्चा करते थे। बीते दो बरस से बतौर हेड कोच अमोल (मुजुमदार) हमारी भारतीय टीम के साथ हैं और वे हमेशा हमें कुछ खास करने और बड़े अवसर के लिए तैयार रहने को कहते थे। हमें सपोर्ट स्टाफ और बीसीसीआई को भी श्रेय देना होगा। हमने अपनी टीम में बहुत बदलाव नहीं किए और उन्होंने हम पर भरोसा किया। सभी की मेहनत और प्रयासों के चलते हम खिताब जीतने में कामयाब हो सके। यह तो आगाज़ है, हम तो इस बाधा को लांघना चाहते थे। हमारी आगे की योजना इस खिताबी जीत को आदत बनाने की है। हम इसका इंतज़ार कर रहे थे। अब यह क्षण आ गया है। आगे भी बहुत ऐसे बड़े मौके आ रहे हैं और हम निरंतर बेहतर करना चाहते हैं। यह अंत नहीं बल्कि आगाज़ है।

कप्तान हरमनप्रीत कौर ने दीप्ति शर्मा की गेंद पर नाडीन क्लार्क का कैच लपककर दक्षिण अफ्रीका का फाइनल में आखिरी विकेट लिया। भारत के वनडे विश्व कप जीतते ही उन्होंने मैदान का चक्कर लगाया और फिर अपनी भारतीय टीम की हर खिलाड़ी को गले लगाया। भारत के खिताब जीतने के बाद हरमनप्रीत अपनी उपकप्तान स्मृति मंधाना के गले से सबसे ज्यादा देर तक लगी रहीं।

हरमनप्रीत ने कहा, ‘मैंने स्मृति के साथ बहुत विश्व कप खेले हैं। जब भी हम हारे, हम टूटे दिल से अपने-अपने घरों को लौटीं और कुछ दिन मौन रहीं। इसके बाद मैदान पर वापस लौटने के बाद हमने खुद से कहा कि हमें पहली गेंद से फिर से शुरुआत करनी है। यह इसलिए दिल तोड़ने वाला रहा क्योंकि हमने साथ बहुत से विश्व कप खेले और हम सेमीफाइनल और फाइनल में पहुंचे, और कई बार तो यहां तक भी नहीं पहुंच पाए। हमने हर बार यही सोचा कि यह सिलसिला आखिर कब टूटेगा।’

जो भी जिम्मेदारी दी जाती है, मैं उसका लुत्फ उठाती हूं : दीप्ति

वनडे विश्व कप की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित की गई भारत की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने कहा, ‘सच कहूं तो यह सपने जैसा लग रहा है क्योंकि हम पर अभी भावनाएं हावी हैं। यह एक वाकई शानदार अहसास है कि मैं अपनी भारतीय टीम को महिला वनडे विश्व कप फाइनल जिताने में इस तरह योगदान कर सकी। हमने बराबर यही सोचा कि हम हर मैच से हासिल सबक का कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने प्रशंसकों के समर्थन के बिना यह मुमकिन नहीं था। बतौर टीम हम बहुत खुश हैं। जहां तक मेरी तैयारियों, जिम्मेदारियों और भूमिका की बात है, तो मुझे जिस भी स्थिति में जो जिम्मेदारी दी जाती है, मैं उसका लुत्फ उठाती हूं।’

दीप्ति ने कहा कि  मैच की स्थिति के मुताबिक खेलना चाहती हूं। विश्व कप फाइनल जैसे बड़े मंच पर बतौर ऑलराउंडर बढ़िया प्रदर्शन से और ज्यादा रोचक व बेहतर कुछ अहसास नहीं हो सकता। दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लॉरा वुल्फर्ट ने फाइनल में बेहतरीन पारी खेली। हम फाइनल में पूरे समय शांत रहे और एक-दूसरे की हौसलाअफजाई करते रहे। गेंदबाजी इकाई के रूप में फाइनल की आखिरी गेंद तक अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंद डालने की बात करते रहे और हमने किया भी यही। 2017 से हालात बहुत बदल गए हैं। मैं उम्मीद करती हूं कि हमें और मैच खेलने को मिलेंगे। मैं यह वनडे विश्व कप की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी की ट्रॉफी अपने माता-पिता को समर्पित करना चाहती हूं।

खुश हूं, योजना को अमली जामा पहनाने में कामयाब हो सकी : शैफाली वर्मा

फाइनल में मैच की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित की गई भारत की सलामी बल्लेबाज शैफाली वर्मा ने कहा, ‘मैंने शुरू में ही कहा था कि भगवान ने मुझे वनडे विश्व कप के फाइनल में कुछ बढ़िया करने के लिए भेजा है, और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रविवार को यही बात साफ दिखी। मैं अपनी भारतीय टीम के महिला वनडे विश्व कप जीतने पर बेहद खुश हूं और इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। यह मुश्किल था लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था कि यदि मैं शांत रही तो मैं हर कुछ भी हासिल कर सकती हूं। मेरे माता-पिता, मेरी दोस्त, मेरे भाई हर किसी ने मेरा समर्थन किया और मुझे यह समझने में मदद की कि मुझे कैसे खेलना है।’

शैफाली ने कहा कि मेरे और मेरी टीम के लिए यह बहुत अहम था और मैं बस अपनी टीम को जिताना चाहती थी। मेरी सोच एकदम साफ थी और मैंने अपनी योजना पर काम किया। मैं खुश हूं कि मैं अपनी योजना को अमली जामा पहनाने में कामयाब हो सकी। स्मृति दी और हरमन दी हर कोई मेरे साथ खड़ी रहीं। मेरी सीनियर साथियों ने मुझसे बस मेरा अपना खेल खेलने को कहा। आपके जेहन में यह सब कुछ साफ रखने की जरूरत होती है। यह बेहद यादगार क्षण है। जब मैंने सचिन तेंडुलकर को देखा तो मुझे गजब की ऊर्जा मिली। मैं खुद से बातें करती रहीं और वह मुझे विश्वास देते रहे। सचिन क्रिकेट के मास्टर हैं और हम बस उन्हें देखकर ही उनसे प्रेरित होते हैं।’

यकीन नहीं हो रहा कि हम वनडे महिला विश्व कप जीत गई हैं : मंधाना

भारत की उपकप्तान स्मृति मंधाना ने कहा, ‘मैं नहीं जानती कि भारत के वनडे क्रिकेट विश्व कप जीतने पर क्या कहूं। अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि हम वनडे महिला विश्व कप जीत गई हैं। मैं क्रिकेट मैदान पर इतनी भावुक कभी नहीं हुई। यह ऐसा क्षण है जिस पर यकीन नहीं हो रहा। अपने घर में विश्व कप जीतना और यह पढ़ना कि “भारत वनडे विश्व कप चैंपियन” बस यकीन नहीं होता। हम अब तक जितने भी विश्व कप में खेले, सभी में हमारा दिल ही टूटा क्योंकि हम इसे अपने नाम नहीं कर पाए। हमने हमेशा से माना कि महिला क्रिकेट के प्रति हमारी जिम्मेदारी बड़ी है।’

स्मृति ने कहा कि हमें वाकई जो अपार समर्थन मिला, मैं नहीं जानती कि बीते 40 दिनों को कैसे बयां करूं। पिछला टी-20 विश्व कप हमारे लिए खासा मुश्किल रहा। हमारा फोकस अपनी फिटनेस पर था। वनडे विश्व कप में हमारी टीम का हर खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ पूरी तरह कदमताल कर खेला। हमारी टीम का माहौल वाकई जादुई था।

YuvaSahakar Desk

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